शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्र आंदोलन के दबाव के बीच लिया बड़ा फैसला

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा:

नीट परीक्षा विवाद और शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवालों के बीच नैतिक जिम्मेदारी लेने की बात कही

नई दिल्ली। पत्रकार सत्ता ब्यूरो
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि यह निर्णय देश के युवाओं के भविष्य, लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने तथा शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवालों के बीच नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर लिया गया है।

धर्मेंद्र प्रधान जुलाई 2021 से केंद्रीय शिक्षा मंत्री थे। उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने की दिशा में कई पहलें हुईं, लेकिन वर्ष 2026 में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं विशेषकर नीट से जुड़े कथित प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा प्रबंधन को लेकर सरकार को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

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कैसे शुरू हुआ विवाद

देश के कई राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और कथित पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद छात्रों का आक्रोश बढ़ने लगा। अभ्यर्थियों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग शुरू की। देखते ही देखते यह विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर के छात्र आंदोलन में बदल गया।

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दिल्ली के जंतर मंतर सहित कई शहरों में हजारों छात्र सड़कों पर उतरे। विभिन्न छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज कर दी। संसद के मानसून सत्र में भी विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठाता रहा, जिससे दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित हुई।

सरकार ने क्या कदम उठाए

विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, अनियमितताओं की जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बावजूद आंदोलनकारी छात्रों का कहना था कि केवल जांच पर्याप्त नहीं है और जवाबदेही तय होनी चाहिए। आंदोलन की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी शामिल रहा।

इस्तीफे में क्या कहा

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम के दौरान अपनी जिम्मेदारी से कभी पीछे नहीं हटे। उनके अनुसार यह किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा का नहीं बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य का विषय है। उन्होंने कहा कि देशहित और छात्रों की आकांक्षाओं को सर्वोपरि रखते हुए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया ताकि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल हो सके और स्थिति का राजनीतिक दुरुपयोग न हो।

आंदोलनकारियों और विपक्ष की प्रतिक्रिया

इस्तीफे के बाद छात्र संगठनों ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी सफलता बताया। विपक्षी दलों ने भी कहा कि यह छात्रों के संघर्ष की जीत है, हालांकि उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग दोहराई।

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आगे क्या

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब केंद्र सरकार के सामने नया शिक्षा मंत्री नियुक्त करने, परीक्षा प्रणाली में सुधार लागू करने तथा छात्रों का भरोसा दोबारा जीतने की चुनौती है। साथ ही आंदोलनकारी संगठन यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी मांग केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा सुधार, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होने तक उनका अभियान जारी रहेगा।

घटनाक्रम एक नजर में

  • प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर विवाद शुरू।
  • देशभर में छात्रों के प्रदर्शन तेज हुए।
  • जंतर मंतर सहित कई स्थानों पर आंदोलन।
  • संसद में विपक्ष ने इस्तीफे की मांग उठाई।
  • धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया।

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