वोट ही सबसे बड़ी ताकत, सवाल पूछिए और संविधान बचाइए’ : डॉ. बीपी अशोक

डॉ. बीपी अशोक बोले- वोट ही संविधान की सबसे बड़ी ताकत

पूर्व IPS अधिकारी ने युवाओं से की जागरूक मतदान की अपील, ‘हिस्सेदारी की लड़ाई वोट से जीती जाएगी’

पत्रकार सत्ता ब्यूरो
नई दिल्ली। पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं सामाजिक चिंतक डॉ. बी.पी. अशोक ने अपने फेसबुक पर जारी एक वीडियो संदेश में देश के युवाओं, वंचित वर्गों और मतदाताओं से संविधान प्रदत्त मतदान के अधिकार का सोच-समझकर प्रयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संविधान लागू होने के बाद से ही देश में समानता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष जारी है। इस संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत अनुच्छेद 326 के तहत मिला मतदान का अधिकार है।

डॉ. अशोक ने अपने संदेश में कहा कि यह केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं, बल्कि विचारों का संघर्ष है। उनके अनुसार यह लड़ाई अंबेडकरवाद बनाम असमानता, संविधान बनाम मनुवाद, सच्चाई बनाम झूठ, विज्ञान बनाम अंधविश्वास, समता बनाम गैर-बराबरी, धर्मनिरपेक्षता बनाम धर्मांधता, लोकतंत्र बनाम तानाशाही, ईमानदारी बनाम भ्रष्टाचार, मोहब्बत बनाम नफरत और युवाओं के भविष्य बनाम गुलामी की मानसिकता के बीच चल रही है।

इसे भी देखें- जंतर मंतर पहुंचे स्वामी प्रसाद मौर्य, छात्र आंदोलन को दिया समर्थन

उन्होंने कहा कि समाज का एक वर्ग अफवाह, झूठ, सामाजिक विभाजन और असमानता के सहारे अपने हितों की रक्षा करता रहा है, जबकि संविधान में विश्वास रखने वाले लोग अपनी लोकतांत्रिक शक्ति का पूरा उपयोग नहीं कर पाते। उन्होंने इसे लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौती बताया।

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने मतदाताओं से अपील की कि चुनाव के समय किसी भी उम्मीदवार को केवल जाति, रिश्तेदारी, दोस्ती, व्यक्तिगत प्रभाव या भावनात्मक आधार पर वोट न दें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रत्याशी से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि वह समाज, शिक्षा, रोजगार, स्थानीय समस्याओं और आर्थिक विकास के लिए क्या योजना लेकर आया है तथा उसकी पार्टी का घोषणापत्र आम जनता के हितों के लिए क्या कहता है।

यह भी पढ़ें- अब CJP ने पीएम से सीधे इस्तीफे की मांग उठाई, एक्स पर पोस्टर जारी कर दिया संदेश

डॉ. अशोक ने कहा कि जब मतदाता जागरूक होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा और संविधान की मूल भावना सुरक्षित रहेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि समाज अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक होगा तो सामाजिक न्याय और समान भागीदारी की लड़ाई को मजबूती मिलेगी।

इसे भी जानें- उत्तराखंड के सिपाही शेर सिंह ने जंतर मंतर पहुंच छात्र प्रोटेस्ट के समर्थन में इस्तीफे का दावा किया

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने लोगों से संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान करते हुए “जय भीम, जय भारत, जय संविधान” का संदेश दिया।

संपादकीय टिप्पणी: यह समाचार डॉ. बी.पी. अशोक के सार्वजनिक वीडियो संदेश पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार उनके व्यक्तिगत विचार हैं। समाचार का उद्देश्य उनके वक्तव्य का तथ्यात्मक और निष्पक्ष प्रस्तुतीकरण है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *