आजाद समाज पार्टी ने विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच 45 सीटों पर प्रभारी किए घोषित, सामाजिक न्याय और रोजगार के मुद्दों पर सरकार को घेरा
शबीह हैदर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में बस्ती के रुदौली, सीतापुर के मिश्रिख और अयोध्या सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनकी सभाओं और कार्यकर्ता सम्मेलनों से पार्टी की चुनावी तैयारियां चर्चा में आई हैं।
20 सितंबर को बस्ती की रुदौली विधानसभा सीट पर चंद्रशेखर आजाद ने आजाद समाज पार्टी के संभावित प्रत्याशी मोहम्मद आकिब के समर्थन में जनसभा और प्रचार कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा और उत्तर प्रदेश में “अघोषित इमरजेंसी” जैसे आरोप लगाए। उन्होंने शिक्षा समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी पार्टी की प्राथमिकताएं भी रखीं।

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मिश्रिख में सामाजिक न्याय प्रचार यात्रा
18 सितंबर को सीतापुर के मिश्रिख मेला मैदान में आजाद समाज पार्टी की सामाजिक न्याय प्रचार यात्रा और कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक चंद्रशेखर आजाद ने यहां वोट की ताकत से परिस्थितियां बदलने की बात कही। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे और बैरिकेडिंग के पास युवाओं के पहुंचने की घटना भी सामने आई।
मिश्रिख में चंद्रशेखर आजाद ने सपा और भाजपा पर भी राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने शिक्षक भर्ती, रोजगार और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने सपा की ओर से छात्र संगठन में नीले रंग के इस्तेमाल पर भी टिप्पणी की और कहा कि केवल रंग बदलने से राजनीतिक चरित्र नहीं बदलता।
45 विधानसभा सीटों पर संगठन विस्तार
आजाद समाज पार्टी ने जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश की 45 विधानसभा सीटों के लिए प्रभारियों की पहली सूची जारी की थी। पार्टी ने इन लोगों को फिलहाल प्रभारी बनाया है, जबकि चुनाव के समय औपचारिक प्रत्याशी घोषित किए जाने की बात सामने आई थी।
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इससे संकेत मिलता है कि पार्टी चुनाव से काफी पहले विधानसभा क्षेत्रों में संगठन खड़ा करने और स्थानीय स्तर पर गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश कर रही है। सूची में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटों को भी शामिल किया गया था।
बाराबंकी की घटना के बाद कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
13 सितंबर को चंद्रशेखर आजाद के काफिले के साथ बाराबंकी में कथित पथराव की घटना सामने आई थी। इस मामले को लेकर आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर प्रदर्शन करते हुए निष्पक्ष जांच और चंद्रशेखर आजाद की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की।
मामले में पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की है। एक रिपोर्ट के अनुसार दो नामजद लोगों सहित करीब 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
2024 की जीत के बाद बढ़ी राजनीतिक पहचान
चंद्रशेखर आजाद ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की नगीना सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद आजाद समाज पार्टी को राज्य की चुनावी राजनीति में अधिक व्यापक पहचान मिली। अब पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ा रही है।
हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि हालिया सभाओं में जुटी भीड़ या पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियां आगामी विधानसभा चुनाव में कितने वोट या सीटों में तब्दील होंगी। इसी तरह सपा, बसपा, कांग्रेस या भाजपा पर इनके संभावित चुनावी प्रभाव का आकलन भी चुनावी गठबंधन, उम्मीदवारों, स्थानीय समीकरणों और मतदान के समय की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
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बहुजन राजनीति में प्रतिस्पर्धा का नया पहलू
उत्तर प्रदेश में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश विभिन्न दल कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी भी गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वर्गों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं कांग्रेस ने भी उत्तर प्रदेश में अपने संगठन और मीडिया विभाग में बदलाव किए हैं।
इसी राजनीतिक वातावरण में चंद्रशेखर आजाद की सभाएं और आजाद समाज पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियां उत्तर प्रदेश की बहुजन राजनीति में एक अलग राजनीतिक दावेदारी के रूप में सामने आ रही हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अभी कई राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में रुदौली, मिश्रिख और अन्य क्षेत्रों में चंद्रशेखर आजाद की सक्रियता को फिलहाल उनकी पार्टी के संगठन विस्तार और चुनावी तैयारी के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है। इसका वास्तविक चुनावी प्रभाव मतदान और चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा।




