यूपी में विपक्षी महागठबंधन की आहट, नवंबर तक हो सकता है बड़ा राजनीतिक धमाका !

यूपी में विपक्षी महागठबंधन की चर्चा तेज, सपा कांग्रेस के साथ बसपा भी आ सकती है साथ सूत्र

सूत्रों का दावा सपा कांग्रेस के साथ बसपा को भी जोड़ने की कोशिश तेज, 2027 की रणनीति पर मंथन

शबीह हैदर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी कुछ महीनों के भीतर बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की कवायद तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के मौजूदा तालमेल को आगे बढ़ाते हुए बहुजन समाज पार्टी को भी विपक्षी गठबंधन में शामिल करने की संभावनाओं पर पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है। हालांकि इस संबंध में तीनों दलों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

Read This : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर कांग्रेस की चिंता, सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग

सूत्र बताते हैं कि यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती है तो नवंबर तक विपक्ष की ओर से कोई बड़ा राजनीतिक संकेत या साझा रणनीति सामने आ सकती है। विपक्षी दलों का मानना है कि अलग अलग चुनाव लड़ने से मतों का बिखराव होता है जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिलता रहा है।

यूपी का जातीय समीकरण क्यों है महत्वपूर्ण

उत्तर प्रदेश की राजनीति लंबे समय से सामाजिक और जातीय समीकरणों पर आधारित रही है। विभिन्न अध्ययनों और सार्वजनिक आकलनों के अनुसार प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग लगभग 40 से 45 प्रतिशत माना जाता है। अनुसूचित जाति की आबादी करीब 21 प्रतिशत है जबकि मुस्लिम मतदाता लगभग 19 प्रतिशत हैं। इसके अलावा सवर्ण समुदाय लगभग 18 से 20 प्रतिशत और अन्य वर्ग शेष आबादी का हिस्सा हैं। यही कारण है कि राजनीतिक दल सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर विशेष जोर देते हैं।

Also Read This : माल ढुलाई में बड़ा सुधार लागू, पूरे देश के लिए एक समान लाइसेंस व्यवस्था

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी का प्रभाव यादव और मुस्लिम मतदाताओं के बीच मजबूत माना जाता है। बहुजन समाज पार्टी का परंपरागत आधार जाटव तथा अन्य अनुसूचित जाति वर्ग रहे हैं जबकि कांग्रेस अब भी कई शहरी क्षेत्रों अल्पसंख्यक मतदाताओं और कुछ सवर्ण वर्गों में अपनी उपस्थिति बनाए हुए है। यदि इन तीनों दलों का मत आधार एक मंच पर आता है तो कई सीटों पर मुकाबला पहले की तुलना में अधिक कड़ा हो सकता है।

पहले भी हुए गठबंधन लेकिन अधूरे रहे प्रयास

उत्तर प्रदेश में भाजपा को रोकने के लिए पहले भी विपक्षी गठबंधन बन चुके हैं।

  • वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था लेकिन भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला।
  • वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन किया। राष्ट्रीय लोकदल भी साथ था लेकिन कांग्रेस अलग चुनाव लड़ी।
  • गठबंधन को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और भाजपा ने अधिकांश सीटों पर जीत दर्ज की।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विपक्षी मतों का पूर्ण एकीकरण न होने और कांग्रेस सपा बसपा के एक साथ न आने के कारण भाजपा को चुनौती सीमित रही।

क्या हो सकता है संभावित लाभ

यदि सपा बसपा और कांग्रेस एक साझा मंच पर आती हैं तो विपक्ष को कई संभावित लाभ मिल सकते हैं।

  • विपक्षी मतों के बंटवारे में कमी आ सकती है।
  • दलित पिछड़ा मुस्लिम और कांग्रेस के पारंपरिक मतों का व्यापक सामाजिक समीकरण बन सकता है।
  • सीटों पर सीधे मुकाबले की स्थिति बन सकती है।
  • संयुक्त प्रचार और साझा उम्मीदवारों से संगठनात्मक मजबूती बढ़ सकती है।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि सीटों के बंटवारे नेतृत्व और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के समन्वय जैसी चुनौतियां किसी भी संभावित गठबंधन के सामने बड़ी परीक्षा होंगी।

भाजपा की रणनीति भी होगी अहम

दूसरी ओर भाजपा पहले ही संगठन विस्तार सामाजिक संपर्क अभियान और विभिन्न वर्गों तक पहुंच बढ़ाने में जुटी हुई है। ऐसे में यदि विपक्ष महागठबंधन की दिशा में आगे बढ़ता है तो मुकाबला पहले की तुलना में अधिक रोचक होने की संभावना है।

फिलहाल सभी निगाहें नवंबर तक होने वाले संभावित राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं। यदि सूत्रों के दावे सही साबित होते हैं तो उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।

यूपी का अनुमानित सामाजिक समीकरण

  • अन्य पिछड़ा वर्ग : 40 से 45 प्रतिशत
  • अनुसूचित जाति : लगभग 21 प्रतिशत
  • मुस्लिम : लगभग 19 प्रतिशत
  • सवर्ण : 18 से 20 प्रतिशत

नोट: ये आंकड़े विभिन्न सार्वजनिक अध्ययनों और चुनावी विश्लेषणों पर आधारित अनुमान हैं। भारत में आधिकारिक जातीय जनगणना के अद्यतन विस्तृत आंकड़े अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *