सहारनपुर में नफरत का बुलडोजर फेल हुआ, हिंदू-मुस्लिम सौहार्द ने बचाया माहौल : निहाल अहमद

सहारनपुर में नफरत का बुलडोजर फेल हुआ

जमीर हैदर। पत्रकार सत्ता
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के नेता एवं मलिहाबाद से जिला पंचायत सदस्य और जिला योजना समिति के सदस्य निहाल अहमद ने सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने की घटना को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद यह पहला मौका है जब किसी मस्जिद को गिराए जाने के बावजूद कहीं भी उसकी खुशी में मिठाई बांटने या जश्न मनाने का माहौल नहीं दिखाई दिया। उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द ने नफरत की राजनीति की कोशिशों को विफल कर दिया।

निहाल अहमद ने कहा कि सहारनपुर में सरकार की ओर से ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता था, लेकिन हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों की समझदारी और आपसी भाईचारे के कारण ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद गिराए जाने का जितना दुख मुस्लिम समुदाय ने महसूस किया, उससे कहीं अधिक अफसोस हिंदू समाज के लोगों ने भी व्यक्त किया।

इसे भी देखें- यूपी अल्पसंख्यक आयोग में मोहसिन रजा बने अध्यक्ष, रूमाना सिद्दीकी समेत 8 सदस्य बनाये गए

सहारनपुर में फेल हो गया नफरत का बुलडोजर

सपा नेता ने कहा कि सहारनपुर में जो कुछ हुआ, उसे केवल प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखने के बजाय उसके राजनीतिक प्रभावों पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि 120 साल पुरानी मस्जिद से संबंधित दस्तावेज लेकर लोग अदालत का दरवाजा खटखटाने और उच्च न्यायालय जाने का अवसर मांगते रहे, लेकिन उन्हें पर्याप्त मौका दिए बिना रात के अंधेरे में बुलडोजर कार्रवाई की गई।

हालांकि, निहाल अहमद के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख उन्होंने अपने बयान में नहीं किया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर ऐसी कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी और संबंधित पक्ष को न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने का अवसर क्यों नहीं दिया गया।

इसे भी जानें- बालागंज में पुलिस का सघन चेकिंग अभियान, मॉडिफाइड साइलेंसर पर कसा शिकंजा

महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर भी साधा निशाना

निहाल अहमद ने अपने बयान में सरकार की आर्थिक नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि नेताओं के पास महंगाई और बेरोजगारी जैसे सवालों का जवाब नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि गन्ने का उचित मूल्य क्या है, चीनी मिलें और कारखाने बंद क्यों हो रहे हैं तथा घरेलू गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों से आम आदमी पर पड़ रहे बोझ का समाधान क्या है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब जनता की रोजमर्रा की समस्याओं और उसकी जेब से जुड़े सवालों का जवाब नहीं मिलता, तब धार्मिक मुद्दों को प्रमुखता देकर राजनीतिक माहौल तैयार किया जाता है। उनके अनुसार, इसी तरह की राजनीति के जरिए समाज को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश की जाती है।

सोचा था मस्जिद गिरेगी तो हिंदू मिठाई बांटेगा

सपा नेता ने कहा कि शायद यह उम्मीद की गई होगी कि मस्जिद गिरने के बाद हिंदू समुदाय के लोग खुशी मनाएंगे, मिठाई बांटेंगे और दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय सड़क पर उतरकर विरोध करेगा। इससे सांप्रदायिक तनाव पैदा होगा और चुनावी राजनीति को इसका लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सहारनपुर में ऐसा नहीं हुआ। उनके अनुसार, मस्जिद गिराए जाने के बाद न तो कहीं बड़े पैमाने पर जश्न का माहौल बना और न ही हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच वैसा तनाव पैदा हुआ, जिसकी आशंका जताई जा रही थी। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के लोगों ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए और मुस्लिम समुदाय ने भी संयम का परिचय देते हुए कानून के रास्ते पर भरोसा किया।

इसे भी पढ़ें- मॉस्को में कानपुर के इंजीनियर की हिरासत पर नया अपडेट: पत्नी ने रूसी सेना में भेजने के दबाव का लगाया आरोप, भारतीय दूतावास सक्रिय

न मुस्लिम सड़क पर आया, न हिंदू ने मिठाई बांटी

निहाल अहमद ने कहा कि मुस्लिम समाज ने हंगामा या हिंसा का रास्ता अपनाने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेने की बात कही, जबकि हिंदू समाज के एक वर्ग ने भी कार्रवाई को लेकर अपनी चिंता और असहमति व्यक्त की। उनके मुताबिक, यही सामाजिक समझदारी नफरत की राजनीति के लिए सबसे बड़ा जवाब है।

उन्होंने कहा, “जब हिंदू और मुस्लिम दोनों समझदार हो जाएं, तो नफरत का हर बुलडोजर फेल हो जाता है।”

निहाल अहमद ने कहा कि सहारनपुर की घटना से यह संदेश निकलता है कि आम जनता अब धार्मिक टकराव के बजाय अपने वास्तविक मुद्दों पर बात करना चाहती है। उन्होंने कहा कि महंगाई, रोजगार, किसानों की आय, चीनी मिलों की स्थिति और आम आदमी की आर्थिक परेशानियां ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर राजनीतिक दलों को जनता के सामने जवाब देना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि सहारनपुर में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द ने संभावित तनाव को टाल दिया और समाज को यह संदेश दिया कि धार्मिक भावनाओं के नाम पर लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना आसान नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *