अब पूरे देश के लिए एकीकृत अखिल भारतीय कंटेनर परिचालन लाइसेंस लागू किया जाएगा।
पत्रकार सत्ता
नई दिल्ली। भारतीय रेल ने माल ढुलाई व्यवस्था को अधिक सरल, तेज और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कंटेनर रेल संचालन नीति में बड़ा सुधार लागू किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को नई व्यवस्था की घोषणा करते हुए कहा कि अब पूरे देश के लिए एकीकृत अखिल भारतीय कंटेनर परिचालन लाइसेंस लागू किया जाएगा। इससे निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और कारोबार करना आसान होगा।
रेल मंत्रालय के अनुसार पहले कंटेनर ट्रेन परिचालकों के लिए अलग-अलग श्रेणियों के लाइसेंस, अलग पंजीकरण शुल्क और मार्ग आधारित प्रतिबंध लागू थे। नई व्यवस्था में इन सभी श्रेणियों को समाप्त कर एक समान अखिल भारतीय लाइसेंस लागू किया गया है। अब पात्र परिचालक भारतीय रेल के पूरे नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेन चला सकेंगे। पंजीकरण शुल्क भी सरल बनाते हुए सभी के लिए एक समान 25 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। लाइसेंस की वैधता 20 वर्ष होगी और सफल संचालन की स्थिति में बिना नवीनीकरण शुल्क के आगे भी बढ़ाई जा सकेगी।
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रेल मंत्री ने कहा कि यह सुधार रेल सुधार अभियान के अंतर्गत लागू किया गया है। इसका उद्देश्य सड़क से रेल की ओर अधिक माल ढुलाई लाना, परिवहन लागत कम करना, निजी निवेश को बढ़ावा देना और देश की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना है। मंत्रालय का मानना है कि नई व्यवस्था से कंटेनर आधारित माल परिवहन को गति मिलेगी और उद्योग जगत को तेज स्वीकृति तथा सरल प्रक्रियाओं का लाभ मिलेगा।
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इसी सुधार पैकेज के तहत रेलवे ने फ्लाई ऐश, उर्वरक और खाद्यान्न की ढुलाई को भी अधिक वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए नई नीतियों की घोषणा की है। साथ ही परियोजनाओं के क्रियान्वयन, वैगन निर्माण और रेल भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में भी कई संरचनात्मक सुधार किए गए हैं।




