बस अड्डों पर घंटों इंतजार, भीड़ में धक्का-मुक्की और खड़े होकर सफर; अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर साधा निशाना
नदीम वक़ार। पत्रकार सत्ता
लखनऊ। रक्षाबंधन पर महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की योगी सरकार की घोषणा कई जगहों पर राहत के बजाय परेशानी का कारण बनती नजर आई। प्रदेश के अलग-अलग बस अड्डों से यात्रियों की भीड़, बसों के लिए लंबा इंतजार और बसों में जगह नहीं मिलने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। कई महिलाओं ने घंटों इंतजार के बाद भी बस नहीं मिलने की शिकायत की।
सरकार ने रक्षाबंधन के मद्देनजर महिलाओं और उनके एक सहयात्री को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में 27 अगस्त सुबह 6 बजे से 29 अगस्त की मध्यरात्रि तक मुफ्त यात्रा की सुविधा दी थी। इसका मकसद बहनों को रक्षाबंधन पर भाइयों तक आसानी से पहुंचाना था।
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कहीं घंटों इंतजार, कहीं खड़े होकर सफर
मुफ्त यात्रा का ऐलान होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं बसों से मायके और भाइयों के घर जाने के लिए निकलीं। लेकिन कई रूटों पर यात्रियों की संख्या के मुकाबले बसें कम पड़ गईं। देवरिया में घंटों इंतजार के बाद भी महिलाओं को बस में जगह नहीं मिली और कई यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की मदद भी लेनी पड़ी।
मैनपुरी और बेवर बस स्टैंड पर भी आगरा, कानपुर और इटावा रूट की बसों के लिए यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। बस अड्डे के अलावा आसपास के मार्गों पर भी यात्री बसों की प्रतीक्षा करते दिखाई दिए।
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आजमगढ़ में दो दिनों में 50 हजार से अधिक महिलाओं के सफर करने की जानकारी सामने आई। रक्षाबंधन के दिन सुबह से ही बस अड्डे पर महिलाओं की भारी भीड़ रही।
भीड़ बढ़ी तो बसों में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की
भदोही में 36 घंटे के दौरान 25,288 बहनों और उनके सहयोगियों के मुफ्त यात्रा करने की जानकारी सामने आई। यहां रक्षाबंधन के दिन बस अड्डे पर सुबह से ही भीड़ रही और बसों में चढ़ने के दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुफ्त यात्रा की घोषणा के बाद यात्रियों की संख्या में कितना इजाफा हुआ। सवाल यह है कि जब सरकार को पहले से बड़ी संख्या में महिलाओं के यात्रा करने का अनुमान था, तो कई प्रमुख रूटों पर बसों की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए इंतजार के वीडियो
बसों की कमी को लेकर यात्रियों की शिकायतों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इन वीडियो में महिलाएं बस का इंतजार करती दिखाई दीं। हालांकि सोशल मीडिया पर सामने आए प्रत्येक वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अलग-अलग जिलों से सामने आई स्थानीय रिपोर्टों में बसों की कमी और यात्रियों की परेशानी की तस्वीर एक जैसी दिखाई दी।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर ऐसे ही वीडियो साझा कर योगी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने ‘बे-बस बहन’ के जरिए तंज कसते हुए आरोप लगाया कि मुफ्त बस यात्रा का वादा करने वाली सरकार के समय महिलाओं को बसों के लिए इंतजार करना पड़ा।
अखिलेश यादव ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि रक्षाबंधन पर मुफ्त बस यात्रा कराने का वादा किया गया, लेकिन बसों की उपलब्धता ही नहीं रही। उन्होंने ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’ वाले राजनीतिक बयान को भी निशाने पर लिया।
सरकार की घोषणा और जमीनी तस्वीर में अंतर का सवाल
योगी सरकार की ओर से रक्षाबंधन के लिए विशेष बस व्यवस्था की गई थी। कई स्थानों पर अतिरिक्त बसें चलाने और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द करने की तैयारी भी की गई थी।
इसके बावजूद देवरिया, मैनपुरी, भदोही और अन्य स्थानों से बसों की कमी और भीड़ की शिकायतें सामने आईं। दूसरी ओर, कई जिलों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने इस सुविधा का लाभ भी उठाया। उदाहरण के तौर पर आजमगढ़ में दो दिनों में 50 हजार से अधिक महिलाओं के सफर की जानकारी सामने आई है।
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ऐसे में रक्षाबंधन की मुफ्त बस यात्रा योजना को लेकर तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। जहां सरकार की योजना से बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक राहत मिली, वहीं कई रूटों पर पर्याप्त बसें उपलब्ध नहीं होने से महिलाओं को घंटों इंतजार, भीड़ और असुविधा का सामना भी करना पड़ा। यही विरोधाभास अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।
सवाल यही है—मुफ्त यात्रा की सुविधा तो मिली, लेकिन क्या हर बहन को समय पर बस भी मिली?
रिपोर्ट : नदीम वक़ार, लखनऊ ब्यूरो




