CJI सूर्यकांत के दीक्षांत समारोह में आने के विरोध पर छात्रों का रजिस्ट्रेशन रोकने के आदेश से शुरू हुआ विवाद, सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद BCI ने लिया यू-टर्न
पत्रकार सत्ता ब्यूरो
नई दिल्ली । NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के छात्रों और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के बीच शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। कांग्रेस नेता शमसुल हसन उमरा ने BCI अध्यक्ष और भाजपा राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग की है।
उमरा ने आरोप लगाया कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को NALSAR के दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने का विरोध करने वाले छात्रों का रजिस्ट्रेशन रोकने की धमकी देना गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि यदि मनन मिश्रा खुद इस्तीफा नहीं देते तो युवाओं के दबाव में उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा।
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रजिस्ट्रेशन रोकने के आदेश से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, NALSAR के करीब 450 छात्रों ने CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद 13 अगस्त को BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने राज्य बार काउंसिलों को NALSAR के 2026 बैच के छात्रों का अधिवक्ता के रूप में नामांकन अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया था।
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मामला सामने आने के बाद तीखी प्रतिक्रिया हुई और कुछ ही घंटों के भीतर BCI ने अपना रुख बदल दिया। संशोधित आदेश में 2026 बैच के छात्रों को नामांकन की अनुमति दे दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने भी उठाए सवाल
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद CJI सूर्यकांत ने BCI की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट में उन्होंने सवाल उठाया कि छात्रों के विरोध के मामले में BCI की क्या भूमिका है और कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है।
इसके बाद मनन कुमार मिश्रा ने छात्रों को संबोधित करते हुए अपने शब्दों और कार्रवाई से किसी की भावनाएं आहत होने पर खेद जताया और माफी मांगी।
अब इस्तीफे की मांग पर गरमाई राजनीति
इसी घटनाक्रम को लेकर शमसुल हसन उमरा ने मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि BCI की कार्रवाई का उद्देश्य छात्रों की आवाज दबाना था और यह विवाद अब युवाओं तथा संस्थागत जवाबदेही के बड़े सवाल में बदल गया है।
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उमरा ने कहा कि आज की Gen Z पीढ़ी न्यायपालिका, पुलिस, प्रशासन और राजनीतिक व्यवस्था के फैसलों को भी सवालों की कसौटी पर कस रही है। उन्होंने दावा किया कि युवा पीढ़ी अब संस्थाओं की आलोचनात्मक समीक्षा कर रही है और यही बदलाव पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहा है।
हालांकि, उमरा के इस बयान में लगाए गए राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, उपलब्ध घटनाक्रम में यह स्पष्ट है कि BCI ने NALSAR छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने वाला अपना आदेश वापस ले लिया और मनन मिश्रा ने बाद में छात्रों से माफी भी मांगी




