कांग्रेस नेता उदय भानु के एक्स पोस्ट में आरोप—परीक्षा के बाद खामियां सामने आने से अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर, पूरी व्यवस्था में जवाबदेही की मांग
पत्रकार सत्ता ब्यूरो
नई दिल्ली। UGC-NET 2026 के तीन विषयों की दोबारा परीक्षा कराने के राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के फैसले के बाद परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल फिर तेज हो गए हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों में सामने आई कई खामियों के बाद इन विषयों की दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतों की जांच के लिए गठित समिति ने प्रश्नपत्रों में गंभीर त्रुटियों की पुष्टि की, जिसके बाद पुनर्परीक्षा का फैसला लिया गया।
इसी घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस के युवा संगठन से जुड़े उदय भानु ने एक्स पर पोस्ट कर केंद्र सरकार और NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पोस्ट में उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में सामने आ रही गड़बड़ियों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में व्यवस्था की जवाबदेही तय होना जरूरी है।
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तीन पेपर दोबारा कराने से अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता
NTA के फैसले के बाद अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र के अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देनी होगी। इससे उन विद्यार्थियों के सामने फिर परीक्षा की तैयारी, समय और परिणाम को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई है।
UGC-NET देशभर में जूनियर रिसर्च फेलोशिप, सहायक प्रोफेसर पद की पात्रता और पीएचडी प्रवेश से जुड़ी महत्वपूर्ण परीक्षा है। ऐसे में परीक्षा के बाद प्रश्नपत्रों में खामियां सामने आना अभ्यर्थियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
एक्स पोस्ट में ‘पेपर लीक’ पर सरकार को घेरा
उदय भानु की एक्स पोस्ट में कहा गया कि देश में ‘पेपर लीक’ के नक्सल को खत्म करने की जरूरत है। पोस्ट में आरोप लगाया गया कि परीक्षा के बाद सामने आ रही गड़बड़ियों से यह सवाल उठता है कि परीक्षा प्रणाली में ऐसी और कितनी कमियां हो सकती हैं, जिनका असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है।
पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि “BJP सरकार इन गलतियों को किस्तों में सामने लाना चाहती है”, ताकि युवाओं का आक्रोश सरकार के शीर्ष नेतृत्व तक न पहुंचे। यह कांग्रेस नेता की राजनीतिक टिप्पणी है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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राहुल गांधी के पुराने बयान का भी किया जिक्र
उदय भानु ने अपने पोस्ट में उस समय राहुल गांधी की ओर से कही गई बात का भी उल्लेख किया, जब परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन चल रहा था। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाए जाने को पहला कदम बताया था और कहा था कि यह आखिरी कदम नहीं है।
हालांकि, इस पूरे राजनीतिक दावे को परीक्षा में सामने आई वर्तमान तकनीकी और प्रश्नपत्र संबंधी खामियों से अलग-अलग देखना जरूरी है।
छात्रों के भविष्य पर सबसे बड़ा सवाल
UGC-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में अभ्यर्थी महीनों और वर्षों तक तैयारी करते हैं। परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र में त्रुटियां सामने आने पर दोबारा परीक्षा का फैसला प्रशासनिक रूप से समाधान हो सकता है, लेकिन अभ्यर्थियों के लिए यह अतिरिक्त मानसिक दबाव और समय की चुनौती भी बनता है।
इसीलिए अब सबसे बड़ा सवाल सिर्फ दोबारा परीक्षा का नहीं, बल्कि यह है कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी जांच की प्रक्रिया में ऐसी खामियां कैसे रह गईं और जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
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छात्र संगठनों और विपक्ष की ओर से लगातार परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की जाती रही है। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि राष्ट्रीय परीक्षाओं में ऐसी गलतियों को परीक्षा से पहले रोकने के लिए व्यवस्था को कितना मजबूत बनाया गया है।
सवाल अब सिर्फ तीन पेपर दोबारा कराने का नहीं है। सवाल यह है कि जिस परीक्षा पर हजारों युवाओं का भविष्य टिका है, उसमें गलती की गुंजाइश आखिर कितनी होनी चाहिए?




