ड्राइवर ने रची साजिश, एक गनर को ड्यूटी पर आने से रोका; मोबाइल की लोकेशन बदलकर पुलिस को किया गुमराह
पत्रकार सत्ता ब्यूरो
लखनऊ। महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह (45) की अपहरण के बाद हत्या के मामले में पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने चलती फॉर्च्यूनर में पहले धीरेंद्र की आंखों में मिर्च पाउडर झोंका और फिर रुमाल में नशीला पदार्थ सुंघाकर उन्हें बेहोश कर दिया। इसके बाद उतरेठिया क्षेत्र के सुनसान स्थान पर उन्हें दो गोलियां मारी गईं। गोली लगने के बाद शव को नहर में फेंक दिया गया और फॉर्च्यूनर को मेदांता अस्पताल के पास छोड़कर आरोपी फरार हो गए।
चार नाम सामने आए, चालक समेत दो हिरासत में
एडीसीपी दक्षिण रल्लापल्ली वसंथ कुमार के अनुसार, अब तक की जांच में चार आरोपियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस ने धीरेंद्र के चालक रवि कुमार तिवारी और उसके एक साथी को हिरासत में लिया है, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस के अनुसार रवि लंबे समय से धीरेंद्र के यहां चालक के रूप में काम कर रहा था और आरोप है कि सुपारी की रकम के लालच में वह साजिश में शामिल हुआ।
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गनर को ड्यूटी से दूर रखने की भी साजिश
जांच में यह भी सामने आया है कि धीरेंद्र को उन्नाव पुलिस की ओर से दो गनर उपलब्ध कराए गए थे। वारदात वाले दिन एक गनर बीमारी के कारण ड्यूटी पर नहीं आया था, जबकि आरोप है कि चालक ने दूसरे गनर को भी ड्यूटी पर आने से रोक दिया। पुलिस अब दोनों गनरों से पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है।
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मोबाइल फोन की लोकेशन बदलकर पुलिस को किया गुमराह
आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए धीरेंद्र के मोबाइल फोन का भी इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार उनके पास कई मोबाइल फोन थे और एक फोन को ट्रेन में रख दिया गया, जिससे उसकी लोकेशन लगातार बदलती रही। फोन की लोकेशन पहले गोसाईंगंज और हैदरगढ़ की तरफ मिली और बाद में चंदौली तक पहुंची। दो फोन घटना के बाद बंद कर दिए गए, जबकि एक फोन का पता नहीं चल सका।
जांच में यह भी पता चला है कि हत्या के बाद धीरेंद्र के मोबाइल से उनके चालक को एक संदेश भेजा गया, जिसमें यह जताने की कोशिश की गई कि धीरेंद्र किसी काम से बाहर गए हैं और उनकी जगह व वजह किसी को न बताई जाए।
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जमीन विवाद से जुड़ रही हत्या की कड़ी
पुलिस की शुरुआती जांच में जमीन विवाद को हत्या की एक प्रमुख वजह माना जा रहा है। अब जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि धीरेंद्र प्रताप सिंह ने उन्नाव के बांगरमऊ क्षेत्र में ग्राम समाज और तालाब की जमीन पर कथित कब्जे तथा फर्जी रजिस्ट्री की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी।
शिकायत में करीब आठ बीघा तालाब की जमीन पर कथित कब्जे और प्लॉटिंग का आरोप लगाया गया था। धीरेंद्र ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच और जमीन की पैमाइश की मांग की थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन शिकायतों का हत्या की साजिश से कोई सीधा संबंध था या नहीं।
परिवार को भी गुमराह करता रहा चालक
जांच के मुताबिक, धीरेंद्र के लापता होने के बाद चालक रवि ने परिवार को यह बताकर गुमराह किया कि वह दोस्तों के साथ प्लासियो मॉल गए हैं और लौटने में समय लगेगा। पुलिस को शक गहराने के बाद चालक से पूछताछ की गई, जिसके बाद हत्या की साजिश से जुड़े कई तथ्य सामने आए।
पुलिस अब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, हत्या में इस्तेमाल हथियार, सुपारी की रकम और जमीन विवाद की वास्तविक भूमिका का पता लगाने में जुटी है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
रिपोर्ट : ज़मीर हैदर, लखनऊ ब्यूरो




