बसपा प्रमुख ने कानून के दायरे में संघर्ष की बात कही नगीना सांसद ने आरोपों का दिया जवाब
शबीह हैदर
लखनऊ मेरठ। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मायावती के बयान के बाद चंद्रशेखर ने मेरठ में पलटवार करते हुए कहा कि यदि पीड़ितों के साथ खड़ा होना मगरमच्छ के आंसू बहाना है तो दूसरे नेता भी ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं।
मायावती ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ संगठन और राजनीतिक दल अपने राजनीतिक हितों के लिए दलित और वंचित समाज को सड़कों पर उतारते हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा हंगामा और सड़क जाम से न्याय नहीं मिलता बल्कि समस्याएं और बढ़ती हैं। उनका कहना था कि अन्याय के खिलाफ लड़ाई संविधान और कानून के दायरे में रहकर लड़ी जानी चाहिए तथा आवश्यकता होने पर सर्वोच्च न्यायालय तक जाना चाहिए।
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इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि पीड़ित परिवारों को वर्षों तक न्याय का इंतजार नहीं कराया जा सकता। उन्होंने कहा कि समाज के साथ अन्याय होने पर आवाज उठाना जरूरी है और जनता के बीच जाना उनकी जिम्मेदारी है।
मायावती ने आगामी चुनावों के मद्देनजर समर्थकों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाकर सत्ता की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। वहीं चंद्रशेखर ने अपने आंदोलन को सामाजिक न्याय की लड़ाई बताया।
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दोनों नेताओं के प्रमुख बयान
- मायावती ने कानून के दायरे में संघर्ष की बात कही
- हिंसा और सड़क जाम का विरोध किया
- चंद्रशेखर ने बयान का जवाब दिया
- पीड़ितों के साथ खड़े रहने की बात दोहराई
- दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी तेज




