शबीह हैदर
लखनऊ, 26 जून। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए अविनाश पांडेय की जगह दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का नया प्रभारी नियुक्त कर दिया है। यह बदलाव केवल एक संगठनात्मक फेरबदल नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस की बदली हुई चुनावी रणनीति और दलित राजनीति पर नए सिरे से फोकस के रूप में देखा जा रहा है।
दिलचस्प यह है कि करीब एक माह पहले तक राजेंद्र पाल गौतम बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात की कोशिश को लेकर विवादों में थे। कांग्रेस नेतृत्व ने इस घटनाक्रम पर उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा था, लेकिन अब वही नेता उत्तर प्रदेश जैसे सबसे अहम चुनावी राज्य के प्रभारी बना दिए गए हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी ने उनके राजनीतिक अनुभव और सामाजिक आधार पर भरोसा जताया है।
अविनाश पांडेय की विदाई के मायने
लगातार चुनावी चुनौतियों और संगठन को अपेक्षित मजबूती न मिलने के बीच कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन का फैसला किया है। अविनाश पांडेय लंबे समय से प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी अब नए चेहरे के साथ नई रणनीति पर आगे बढ़ना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए संगठन में बदलाव कर रही है। इसी रणनीति के तहत अनुसूचित जाति समाज से आने वाले राजेंद्र पाल गौतम को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मायावती प्रकरण के बाद बदली तस्वीर
मई 2026 में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया के साथ राजेंद्र पाल गौतम बसपा प्रमुख मायावती से मिलने उनके लखनऊ स्थित आवास पहुंचे थे। हालांकि मुलाकात नहीं हो सकी और कांग्रेस ने इसे अधिकृत कार्यक्रम नहीं बताते हुए दोनों नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
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उस समय राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हुई थीं, लेकिन अब पार्टी हाईकमान ने राजेंद्र पाल गौतम को प्रदेश प्रभारी बनाकर यह संदेश दिया है कि नेतृत्व उनके राजनीतिक कौशल और संगठनात्मक क्षमता पर भरोसा करता है।
कौन हैं राजेंद्र पाल गौतम?
राजेंद्र पाल गौतम दिल्ली की सीमापुरी विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। वे अरविंद केजरीवाल सरकार में सामाजिक कल्याण, अनुसूचित जाति-जनजाति और जल मंत्री भी रहे। वर्ष 2022 में एक धार्मिक कार्यक्रम से जुड़े विवाद के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
सितंबर 2024 में उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा। इसके बाद उन्हें कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। अब उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे सबसे बड़े राजनीतिक राज्य की जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने उनके कद को और बढ़ा दिया है।
क्या अजय राय पर भी फैसला होगा?
प्रदेश प्रभारी बदलने के बाद अब राजनीतिक हलकों में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि पार्टी की ओर से उनके संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल इसे केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है।
2027 की तैयारी का संकेत
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस लगातार संगठन विस्तार, बूथ स्तर पर मजबूती और दलित-पिछड़े वर्गों के बीच जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सबसे बड़े राजनीतिक दांवों में से एक माना जा रहा है।
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अब देखने वाली बात होगी कि दलित राजनीति के इस नए चेहरे के नेतृत्व में कांग्रेस उत्तर प्रदेश की राजनीति में कितना प्रभाव छोड़ पाती है।




