पत्रकार सत्ता | भोपाल ब्यूरो
धार (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित सरकारी इमामबाड़े को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि वह 24 घंटे के भीतर सरकारी इमामबाड़े की चाबी मुस्लिम समुदाय के याचिकाकर्ता को सौंपे, ताकि मुहर्रम के अवसर पर वहां ताजिया बनाने और परंपरागत धार्मिक कार्यक्रम संपन्न कराए जा सकें। हालांकि यह अनुमति केवल सीमित अवधि के लिए है और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद चाबी प्रशासन को वापस सौंपनी होगी।
क्या है पूरा मामला?
धार शहर के किला क्षेत्र में स्थित सरकारी इमामबाड़े का उपयोग वर्षों से मुहर्रम के दौरान ताजिया निर्माण और धार्मिक आयोजनों के लिए होता रहा है। लेकिन अगस्त 2025 में प्रशासन ने इसे लोक निर्माण विभाग (PWD) के हवाले कर दिया था। प्रशासन का कहना था कि एसडीएम कोर्ट ने इसे सरकारी संपत्ति माना था और इस संबंध में ताजिया कमेटी की अपील भी खारिज हो चुकी थी। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस इमामबाड़े में ताजिया बनाने की परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है और मुहर्रम के दौरान इसका उपयोग धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है। वहीं राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि समुदाय के लिए अन्य वैकल्पिक स्थान भी उपलब्ध कराए गए हैं।
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हाई कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं और उनके समुदाय को केवल पांच दिनों के लिए इमामबाड़े का उपयोग करने दिया जाता है तो इससे राज्य सरकार को कोई नुकसान नहीं होगा। इसी आधार पर अदालत ने संबंधित एसडीओ को निर्देश दिया कि 24 घंटे के भीतर इमामबाड़े की चाबी याचिकाकर्ता सिद्दीकी को सौंप दी जाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि—
- इमामबाड़े का उपयोग केवल मुहर्रम के कार्यक्रमों के लिए किया जाएगा।
- विवादित संपत्ति में किसी प्रकार का निर्माण, तोड़फोड़ या स्थायी परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
- पूरा कार्यक्रम समाप्त होने के बाद 1 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजे तक चाबी प्रशासन को वापस सौंपना अनिवार्य होगा।
- पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जाएगी।
- मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को होगी।
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आदेश के बाद प्रशासन की तैयारी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। अदालत में सुनवाई और आदेश के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की अपुष्ट सूचनाएं भी प्रसारित हुईं, जिसके चलते धार में तनाव की स्थिति बनी। पुलिस ने अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया और लोगों से केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की।
यह अंतिम फैसला नहीं है
महत्वपूर्ण बात यह है कि हाई कोर्ट का यह आदेश अंतरिम (Interim) राहत है, अंतिम निर्णय नहीं। अदालत ने केवल मुहर्रम के दौरान सीमित अवधि के लिए इमामबाड़े के उपयोग की अनुमति दी है। इमामबाड़े के स्वामित्व और अन्य कानूनी अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।
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गौर तलब है कि धार के सरकारी इमामबाड़े को लेकर जारी विवाद के बीच हाई कोर्ट का यह आदेश फिलहाल मुहर्रम के धार्मिक कार्यक्रमों को ध्यान में रखकर दिया गया अंतरिम निर्देश है। अदालत ने एक ओर मुस्लिम समुदाय को परंपरागत धार्मिक गतिविधियां संचालित करने की सीमित अनुमति दी है, वहीं प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और विवादित संपत्ति की यथास्थिति सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। ऐसे में यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और इसकी अंतिम कानूनी स्थिति आगामी सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।

