लखनऊ में चंद्रशेखर खुद तो दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता यूसुफ़ अंसारी संभालने कमान
शबीह हैदर
लखनऊ। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) को दिल्ली में 24 सितंबर को ‘संपूर्ण भागीदारी आंदोलन’ के तहत प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद पार्टी ने अपनी रणनीति बदल दी है। अब पार्टी देशभर के जिला मुख्यालयों पर जिलाधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपेगी। पार्टी अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने मंगलवार को इस कार्यक्रम का ऐलान किया था। चंद्र आज़ाद ने कहा कि दिल्ली में अनुमति नहीं मिलने के बावजूद आंदोलन रुकने वाला नहीं है। 24 सितंबर को आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी देशभर के जिला मुख्यालयों पर अपनी ताकत दिखाएंगी। लखनऊ में खुद चंद्रशेखर आज़ाद कमान संभालेंगे, जबकि दिल्ली में राष्ट्रीय प्रवक्ता यूसुफ़ अंसारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली के उपराज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगा।
ज्ञापन राष्ट्रपति महोदया को संबोधित है और इसमें SC, ST, OBC, महिलाओं तथा अन्य वंचित वर्गों के सामाजिक न्याय, समान अवसर और उचित प्रतिनिधित्व से जुड़ी 24 प्रमुख मांगें शामिल हैं। पार्टी का कहना है कि भारतीय संविधान समानता और समान अवसर का अधिकार देता है, फिर भी इन वर्गों को शिक्षा, रोजगार, राजनीति, प्रशासन, न्यायपालिका और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उचित भागीदारी नहीं मिल पाई है। आरक्षण केवल आर्थिक आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को दूर करने का संवैधानिक माध्यम है।

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प्रमुख मांगों में नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना, दलित-आदिवासी-पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए ‘कोटे के अंदर कोटा’ तथा स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण शामिल है। उत्तर प्रदेश में स्पेशल कंपोनेंट प्लान बजट से बने चार मेडिकल कॉलेजों में SC/ST छात्रों के लिए समाप्त की गई 70 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था को तुरंत बहाल करने की मांग भी की गई है।
OBC समाज को लोकसभा, विधानसभा, राज्यसभा और विधान परिषदों में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने, जातिगत जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम जोड़ने, उच्च न्यायपालिका में प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और कॉलेजियम व्यवस्था खत्म कर उच्च न्यायिक आयोग गठित करने की मांग की गई है। OBC क्रीमी लेयर की आय सीमा की तुरंत समीक्षा, पदोन्नति में आरक्षण, UGC नियमों को प्रभावी बनाना, SC-ST एक्ट के मामलों में मुआवजा 30 लाख रुपये करने, सरकारी योजनाओं-बजट में आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी, ठेकों-खरीद में आरक्षण तथा निजी क्षेत्र में प्रबंधन स्तर तक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने जैसी मांगें भी शामिल हैं।
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ज्ञापन में मंडल आयोग की सिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू करने, बैकलॉग पदों को तुरंत भरने, लेटरल एंट्री बंद करने, 2 अप्रैल 2018 के आंदोलन के मुकदमे वापस लेने, छात्रावास निर्माण, सफाई कर्मियों को स्थायी नियुक्ति, सीवर सफाई में मानव प्रवेश पूरी तरह बंद करने तथा अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति नियमित करने की भी मांग की गई है।
पार्टी का कहना है कि ये मांगें सामाजिक न्याय और संविधान की भावना से जुड़ी हैं। इसलिए संबंधित संवैधानिक संस्थाओं और केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। आजाद समाज पार्टी का दावा है कि 24 सितंबर का यह देशव्यापी कार्यक्रम वंचित वर्गों की एकजुटता का प्रतीक बनेगा और राष्ट्रपति तक उनकी आवाज पहुंचाएगा।
राष्ट्रपति को सौंपे जाने वाले ज्ञापन की पांच प्रमुख मांगें
1. नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए ‘कोटे के अंदर कोटा’ लागू किया जाए तथा स्थानीय निकायों में भी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
2. स्पेशल कंपोनेंट प्लान (SCP) बजट से निर्मित कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन व सहारनपुर के चार मेडिकल कॉलेजों में SC/ST विद्यार्थियों के लिए समाप्त की गई 70 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था को यूपी सरकार एक्ट बनाकर तुरंत पुनः लागू करे।
3. OBC समाज को लोकसभा और विधानसभाओं में उचित एवं प्रभावी राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया जाए। साथ ही SC, ST और OBC के लिए राज्यसभा एवं विधान परिषदों में भी उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
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4. उच्च न्यायपालिका में SC, ST और OBC का प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम व्यवस्था समाप्त कर उच्च न्यायिक आयोग का गठन किया जाए।
5. केंद्र एवं राज्य सरकारों में SC, ST और OBC के सभी बैकलॉग पदों को तुरंत भरा जाए तथा सरकारी सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण का लाभ दिया जाए।
ब्यूरो रिपोर्ट, लखनऊ




