दिल्ली का नहीं, पूरे देश के आम वोटर के बहिष्करण का खेल: निहाल अहमद

SIR पर निहाल अहमद का हमला, बोले- आम वोटर के बहिष्करण का खेल

SIR के बहाने आम, गरीब और प्रवासी मतदाताओं पर बढ़ रहा दस्तावेजों का बोझ, बड़े नामों की चर्चा के पीछे छिपे असली सवालों पर ध्यान देने की जरूरत

पत्रकार सत्ता ब्यूरो
लखनऊ/मलिहाबाद। वरिष्ठ समाजवादी पार्टी नेता एवं मलिहाबाद से जिला पंचायत सदस्य निहाल अहमद ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुए बदलाव को केवल दिल्ली की वोटर लिस्ट का मामला समझना ठीक नहीं होगा। उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया देश के आम मतदाताओं के सामने आने वाली संभावित चुनौतियों का संकेत हो सकती है।

निहाल अहमद ने कहा कि SIR के दौरान बड़े नेताओं और चर्चित लोगों के नामों से जुड़ी खबरें सामने आने से यह संदेश जाता है कि प्रक्रिया सभी के लिए समान है। लेकिन उनके अनुसार वास्तविक चिंता उन आम मतदाताओं को लेकर है, जिनके पास पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं या जो रोजगार के कारण एक शहर से दूसरे शहर में लगातार स्थानांतरित होते रहते हैं।

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उन्होंने कहा कि दिल्ली के ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47.56 लाख नाम शामिल नहीं किए गए। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार इनमें ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनके गणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हुए तथा जिन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणियों में चिन्हित किया गया। प्रभावित मतदाताओं को दावा और आपत्ति दाखिल करने का अवसर दिया गया है।

निहाल अहमद ने बिहार में हुई SIR प्रक्रिया का भी हवाला देते हुए कहा कि वहां 2025 में करीब 65 लाख मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर रह गए थे। निर्वाचन आयोग के अनुसार बाद की प्रक्रिया में दावों-आपत्तियों और नए पंजीकरण के बाद अंतिम सूची में करीब 7.42 करोड़ मतदाता शामिल किए गए।

उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में मजदूर और कामगार रोजगार के लिए अपने मूल निवास स्थान से दूसरे राज्यों और शहरों में जाते हैं। इसी तरह किराये के मकानों में वर्षों से रहने वाले लोगों के पास भी हर पुराने पते या पारिवारिक रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध होना जरूरी नहीं है।

निहाल अहमद के मुताबिक, “नामचीन लोगों के नाम यदि मतदाता सूची में किसी कारण से प्रभावित होते हैं तो उनके पास दस्तावेज, कानूनी सहायता और प्रशासन तक पहुंच के पर्याप्त साधन होते हैं। लेकिन आम मतदाता के लिए BLO कार्यालय के चक्कर लगाना, पुराने दस्तावेज जुटाना और समय पर दावा दाखिल करना बड़ी चुनौती बन सकता है।”

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उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण यदि किया जा रहा है तो उसकी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम केवल दस्तावेजों की कमी या तकनीकी कारण से मतदान के अधिकार से बाहर न हो।

निहाल अहमद ने SIR को लेकर अपनी राजनीतिक चिंता जाहिर करते हुए कहा कि “यह सवाल केवल वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न हों।”

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उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान आम लोगों को पर्याप्त समय, स्पष्ट सूचना और सरल शिकायत निवारण व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि पात्र मतदाता अपने नाम और अधिकार की रक्षा कर सकें।

ब्यूरो रिपोर्ट, लखनऊ

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