पत्रकार सत्ता ब्यूरो
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया है। नई दिल्ली में आयोजित ‘रचनात्मक कांग्रेस राष्ट्रीय अधिवेशन’ में खड़गे ने वर्ष 1958 की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से एक गंभीर हादसे का मुद्दा उठाया था और तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उस पर सदन में चर्चा कर जवाब दिया था।
खड़गे ने कहा कि आज देश में बच्चों की मौत, छात्रों पर कथित गोलीबारी और महिलाओं के साथ हो रही घटनाओं जैसे गंभीर मुद्दे सामने आ रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार संसद में इन पर चर्चा के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के सवालों का सदन में जवाब देने से बच रही है।
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1958 की घटना का दिया उदाहरण
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने संबोधन में 23 अप्रैल 1958 को दिल्ली में दो बच्चों की हादसे में हुई मौत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस घटना पर तत्कालीन विपक्षी नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में स्थगन प्रस्ताव दिया था। खड़गे के मुताबिक तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संसद में चर्चा कर जवाब दिया था।
खड़गे ने इस उदाहरण के जरिए मौजूदा सरकार और उस समय की सरकार के बीच संसदीय जवाबदेही की तुलना की।
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गृह मंत्री पर भी साधा निशाना
खड़गे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री लंबे समय तक सदन में मौजूद नहीं रहे, जबकि सरकार की ओर से बाहर यह कहा जाता रहा कि वह चर्चा के लिए तैयार है।
उन्होंने अमित शाह के उस कथित बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि गृह मंत्री संसद में आकर अपने कक्ष में ही बैठते हैं तो फिर सदन में विपक्ष के सवालों का जवाब कौन देगा। खड़गे ने कहा कि संसद लोकतांत्रिक संवाद और जवाबदेही का मंच है और गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।
कांग्रेस ने संसद में चर्चा को बनाया मुद्दा
कांग्रेस लगातार संसद में सरकार से विभिन्न मुद्दों पर जवाब देने और चर्चा कराने की मांग करती रही है। ‘रचनात्मक कांग्रेस’ सम्मेलन में भी पार्टी नेतृत्व ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही, युवाओं, छात्रों और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सम्मेलन में बेरोजगारी और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर भी चर्चा केंद्रित रही।
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खड़गे के बयान ने एक बार फिर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव को सामने ला दिया है। कांग्रेस जहां इसे सरकार की जवाबदेही से जोड़ रही है, वहीं इस तरह के आरोपों पर केंद्र की प्रतिक्रिया को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




