दिग्विजय भाटी से कथित मारपीट पर जांच के आदेश, SSP अविनाश पांडेय भी जांच के घेरे में

दिग्विजय भाटी से मारपीट के आरोप, SSP अविनाश पांडेय पर जांच शुरू

पुलिस हिरासत में मारपीट के आरोपों से गरमाई मेरठ की सियासत, ADG ने शुरू कराई जांच

पत्रकार सत्ता। डिजिटल डेस्क
मेरठ । मेरठ में किसान नेता एवं गुर्जर समाज से जुड़े नेता डॉ. दिग्विजय भाटी के साथ पुलिस हिरासत में कथित मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) ने जांच के आदेश दिए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक जांच के दायरे में मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय भी हैं। पुलिस ने हालांकि मारपीट के आरोपों को खारिज किया है।

बताया जा रहा है कि यह मामला मेरठ में छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर हुए प्रदर्शन और उसके बाद पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, जिनमें मोहित जाटव और दिग्विजय भाटी के नाम भी शामिल हैं।

हिरासत में मारपीट के लगाए गए गंभीर आरोप

दिग्विजय भाटी की ओर से आरोप लगाया गया है कि उन्हें और मोहित जाटव को करीब 12 घंटे तक पुलिस हिरासत में रखा गया और इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई। आरोपों में एसएसपी अविनाश पांडेय और सिविल लाइन थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ का नाम भी लिया गया है।

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दिग्विजय भाटी के साथ कथित मारपीट और उनकी आंख में चोट लगने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की जांच अब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पुलिस ने आरोपों को बताया गलत

पुलिस की ओर से कथित मारपीट के आरोपों को खारिज किया गया है। पुलिस का कहना है कि 8 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ी थी और पुलिसकर्मियों के साथ भी हाथापाई हुई थी। पुलिस के अनुसार घटना में 11 पुलिसकर्मी घायल हुए थे और एक महिला दरोगा भी बेहोश हुई थीं।

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पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर न्यूनतम आवश्यक बल प्रयोग किए जाने का दावा किया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दिग्विजय भाटी समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

अब जांच से सामने आएगा सच

मामले में ADG स्तर से जांच शुरू होने के बाद पुलिस कार्रवाई और हिरासत में कथित मारपीट के आरोपों की निष्पक्षता पर नजर रहेगी। जांच में यदि किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

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वहीं इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी तेज हो रही हैं। ऐसे में जांच की रिपोर्ट इस पूरे विवाद में सबसे अहम साबित होगी।
रिपोर्ट : ज़मीर हैसर, डिजिटल डेस्क

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