संसद में विरोध की रणनीति पर जोर, संवैधानिक संशोधन पर विपक्ष ने दोहराया साझा रुख
पत्रकार सत्ता ब्यूरो
नई दिल्ली। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि संविधान में बड़े संशोधन या संभावित परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केवल संसदीय संख्या बल के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता। पार्टी का कहना है कि ऐसे मामलों में व्यापक राजनीतिक सहमति, संघीय ढांचे का सम्मान और संसदीय परंपराओं का पालन आवश्यक है।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डॉ. सैयद नासिर हुसैन ने एक साक्षात्कार में कहा कि संविधान संशोधन को बदलते राजनीतिक समीकरणों के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। उनका कहना था कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को ऐसा पूर्ण जनादेश नहीं मिला, जिसके आधार पर इस प्रकार के व्यापक संवैधानिक बदलाव किए जाएं।
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उन्होंने बताया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों और अन्य विपक्षी दलों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। उनके अनुसार, पिछली संसदीय कार्यवाही के दौरान जिन दलों ने परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों का विरोध किया था, उनके साथ साझा रणनीति पर चर्चा जारी है।
नासिर हुसैन ने दावा किया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) सहित कई विपक्षी दल इस विषय पर पहले से घोषित अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि यदि व्यापक राजनीतिक सहमति के बिना परिसीमन से संबंधित कोई विधेयक संसद में लाया जाता है, तो विपक्ष उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगा।
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हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सरकार पहले भी कह चुकी है कि परिसीमन से जुड़े किसी भी निर्णय की प्रक्रिया संविधान और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही होगी।




