कांग्रेस सचिव शाहनवाज़ आलम ने आरएसएस कार्यकर्ताओं पर पुलिस वर्दी पहनकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया, सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से स्वतंत्र जांच कराने की मांग
पत्रकार सत्ता ब्यूरो
नई दिल्ली। संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करने वालों में कुछ लोग बिना नेमप्लेट वाली पुलिस वर्दी और कुछ सादे कपड़ों में मौजूद थे। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए।
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जारी प्रेस विज्ञप्ति में शाहनवाज़ आलम ने आरोप लगाया कि छात्रों पर कार्रवाई के दौरान सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरों में बिना नेमप्लेट वाली वर्दी पहने लोग दिखाई दे रहे हैं। उनका दावा है कि ऐसे लोगों की पहचान कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि वे किस एजेंसी या बल से संबंधित थे।
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उन्होंने वर्ष 2020 के सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय भी इसी प्रकार के आरोप लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने उस समय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को ज्ञापन देकर मामले की जांच की मांग की थी।
शाहनवाज़ आलम ने आरोप लगाया कि यदि सादे कपड़ों और बिना नेमप्लेट वाली वर्दी में दिखाई दे रहे लोगों की निष्पक्ष पहचान कराई जाए तो कई तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से पूरे प्रकरण का स्वतः संज्ञान लेने तथा किसी सिटिंग जज की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
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इस बीच सोशल मीडिया पर भी कई तस्वीरें और वीडियो साझा किए जा रहे हैं, जिनमें कुछ लोगों के सादे कपड़ों में लाठी लिए दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन व्यक्तियों की आधिकारिक पहचान अथवा उनकी भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है। पुलिस या अन्य संबंधित एजेंसियों की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्षी दल निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि इस संबंध में सक्षम जांच अथवा आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।




