2 साल तक विधान परिषद सदस्य रहे हीरा ठाकुर ने जातिगत जनगणना को बनाया मुद्दा, राजेंद्र पाल गौतम, अनिल जयहिंद और सांसद राकेश राठौर की मौजूदगी में ली कांग्रेस की सदस्यता
पत्रकार सत्ता ब्यूरो
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं उत्तर प्रदेश विधान परिषद के पूर्व सदस्य हीरा ठाकुर ने सोमवार को भाजपा छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया। कांग्रेस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक हीरा ठाकुर कांग्रेस की जनहितैषी विचारधारा से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हुए। सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, एआईसीसी ओबीसी विभाग के चेयरमैन अनिल जयहिंद और सीतापुर से कांग्रेस सांसद राकेश राठौर मौजूद रहे।
जातिगत जनगणना को लेकर भाजपा पर साधा निशाना
कांग्रेस में शामिल होने के बाद हीरा ठाकुर ने भाजपा छोड़ने की वजह भी बताई। उन्होंने आरोप लगाया कि जातिगत जनगणना के मुद्दे पर पिछड़े वर्गों के साथ धोखा हुआ है। ठाकुर ने राहुल गांधी द्वारा जातिगत जनगणना के मुद्दे को मजबूती से उठाने का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछड़े वर्गों को उनके अधिकार मिलने चाहिए।
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उन्होंने जननायक कर्पूरी ठाकुर का भी जिक्र किया और कहा कि पिछड़े वर्गों की बड़ी आबादी आज भी अपने अधिकारों से वंचित है। हीरा ठाकुर लंबे समय से अति-पिछड़े समाज के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं।
करीब 12 साल रहे विधान परिषद सदस्य
हीरा ठाकुर उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़े वर्ग से जुड़े प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। वह करीब 12 साल तक विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली और उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था। वह राष्ट्रीय कर्पूरी ठाकुर विचार मंच से भी जुड़े हैं।
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कांग्रेस को ओबीसी राजनीति में कितना फायदा?
हीरा ठाकुर के कांग्रेस में शामिल होने को उत्तर प्रदेश की पिछड़ा वर्ग राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस लगातार सामाजिक न्याय, जातिगत जनगणना और ओबीसी अधिकारों के मुद्दे को प्रमुखता दे रही है। ऐसे में पिछड़े और अति-पिछड़े वर्गों के बीच सक्रिय रहे हीरा ठाकुर का कांग्रेस में आना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
हालांकि, उनके कांग्रेस में शामिल होने का चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल उनका भाजपा छोड़ना और कांग्रेस में जाना यूपी की राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।




