नदीम वक़ार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के एक अवर अभियंता, सुपरवाइजर और एक निजी व्यक्ति को 7.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता निर्माण संबंधी कार्य करा रहा था। इसी दौरान उसके खिलाफ आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायत का हवाला देकर कार्रवाई की बात कही गई। आरोप है कि मामले को निपटाने और किसी प्रकार की कार्रवाई से बचाने के एवज में 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई।
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बताया जाता है कि शिकायतकर्ता ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, जिसके बाद दो किश्तों में भुगतान की बात तय हुई। पहली किश्त के रूप में 7.50 लाख रुपये दिए जाने थे। शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना विजिलेंस को दी, जिसके बाद टीम ने पूरे मामले का सत्यापन किया और जाल बिछाकर आरोपियों को रिश्वत लेते समय धर दबोचा।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में दिनेश कुमार वर्मा, अवर अभियंता (एलडीए), चंद्र प्रकाश, सुपरवाइजर (एलडीए) तथा श्रवण कुमार, एक निजी व्यक्ति शामिल हैं। जांच में तीनों की मिलीभगत सामने आने के बाद उन्हें हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शिकायतकर्ता पर आईजीआरएस शिकायत के निस्तारण के नाम पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। विजिलेंस ने मामले में आवश्यक साक्ष्य जुटाने के बाद ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया।
उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान की यह हाल के दिनों की बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




