पेपर लीक पर संसद में आरपार की लड़ाई, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक धरने पर बैठेंगे चंद्रशेखर आजाद !

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पेपर लीक को देशद्रोह घोषित कर उम्रकैद का कानून बनाने की मांग, जंतर मंतर के आंदोलन को संसद तक ले जाने की तैयारी

रिपोर्ट : शबीह हैदर
नई दिल्ली। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन को रविवार को नया राजनीतिक समर्थन मिला। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने घोषणा की है कि यदि केंद्र सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर निर्णय नहीं लेती है तो वह संसद परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि पेपर लीक केवल परीक्षा में गड़बड़ी नहीं बल्कि देश के युवाओं के भविष्य पर सीधा हमला है।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि पेपर लीक को देशद्रोह की श्रेणी में लाया जाना चाहिए और ऐसे मामलों में दोषियों के लिए उम्रकैद जैसी कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मांग के साथ वह संसद पहुंचेंगे और सरकार से शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग करेंगे।

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इससे पहले शनिवार देर रात आजाद ने जंतर मंतर पहुंचकर आंदोलनरत छात्र-छात्राओं और छात्र नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी इस आंदोलन को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहने देगी बल्कि देशभर में युवाओं की आवाज को संगठित करेगी। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने से लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

राजनीतिक रंग चढ़ता आंदोलन

चंद्रशेखर आजाद ने अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में जंतर मंतर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। उनके आह्वान पर राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश से सैकड़ों लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं। आजाद संसद मार्च में शामिल होने की कोशिश करेंगे। अगर अनुमति नहीं मिली तो वे सुबह 10:30 बजे संसद पहुंचकर धरने पर बैठ जाएंगे।

सूत्रों के अनुसार जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन को लेकर प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। हालांकि चंद्रशेखर आजाद के पहुंचने के बाद आंदोलन को नई राजनीतिक ऊर्जा मिली और विभिन्न राज्यों से समर्थकों के दिल्ली पहुंचने की सूचना है। पार्टी कार्यकर्ताओं को संसद सत्र के दौरान बड़ी संख्या में राजधानी पहुंचने का आह्वान किया गया है।

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आजाद ने कहा कि यदि संसद परिसर में धरने की अनुमति नहीं मिली तो भी वह लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक से युवाओं का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मानसून सत्र में पेपर लीक का मुद्दा विपक्ष के प्रमुख एजेंडों में शामिल रह सकता है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल पहले ही परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठा चुके हैं। ऐसे में चंद्रशेखर आजाद के धरने के ऐलान से यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा का केंद्र बन सकता है।

सरकार पर दबाव बढ़ा

चंद्रशेखर आजाद का यह कदम संसद के मानसून सत्र में विपक्ष की रणनीति को मजबूती देगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर धरना लंबा चला तो सरकार को इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने पड़ सकते हैं।
देश भर के युवा इस आंदोलन को बारीकी से देख रहे हैं। क्या सरकार छात्रों की मांगों को मानती है या फिर दमन का रास्ता अपनाती है—यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

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समाचार लिखे जाने तक शिक्षा मंत्रालय या केंद्र सरकार की ओर से चंद्रशेखर आजाद की घोषणा पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई थी। वहीं संसद परिसर में प्रस्तावित धरने को लेकर भी आधिकारिक अनुमति संबंधी जानकारी सामने नहीं आई है।

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