1978 की बीए डिग्री से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में अगली सुनवाई, सोशल मीडिया के दावों पर भी उठे सवाल
पत्रकार सत्ता। डिजिटल डेस्क
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। मोदी की 1978 की बीए डिग्री से संबंधित मामले में 20 अगस्त 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। दिल्ली विश्वविद्यालय को इस मामले में अपनी आपत्तियां दाखिल करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय भी मिल चुका है।
मामले की शुरुआत उस सूचना के अधिकार आवेदन से हुई थी, जिसमें वर्ष 1978 में बीए परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों के रिकॉर्ड के निरीक्षण की मांग की गई थी। इसी वर्ष नरेंद्र मोदी ने भी बीए परीक्षा उत्तीर्ण की थी। केंद्रीय सूचना आयोग ने वर्ष 2016 में रिकॉर्ड के निरीक्षण की अनुमति दी थी, जिसे बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय ने अदालत में चुनौती दी।
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अगस्त 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के संबंधित आदेश को रद्द कर दिया था। इसके बाद इस फैसले से जुड़ी अपीलों और कानूनी प्रक्रियाओं पर सुनवाई जारी रही।
20 अगस्त पर क्यों टिकी नजर?
अब 20 अगस्त की सुनवाई को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह मामला प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े पुराने विवाद को फिर सार्वजनिक बहस में ले आया है। हालांकि, सिर्फ सुनवाई होने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने मोदी की डिग्री को फर्जी घोषित कर दिया है या प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई दोष सिद्ध हो गया है।
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सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और चुनाव आयोग से जुड़े कुछ दावे भी प्रसारित हो रहे हैं। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में अभी इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें खबर में पुष्ट तथ्य के रूप में लिखना उचित नहीं होगा।
अब निगाहें 20 अगस्त की दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाही पर हैं। अदालत में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि इस पुराने डिग्री विवाद में आगे की कानूनी राह क्या बनती है।




