केजीएमयू में नॉनवेज पर रोक का प्रमोद तिवारी ने किया विरोध

महंगाई और आपातकाल पर प्रमोद तिवारी का सरकार पर हमला

बोले खानपान की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध उचित नहीं

पत्रकार सत्ता
लखनऊ। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता और वरिष्ठ कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में परिसर के भीतर मांसाहारी भोजन पर रोक लगाए जाने के निर्णय पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शामिल केजीएमयू की पहचान शैक्षणिक उत्कृष्टता से रही है और इस तरह के निर्णय संस्थान की मूल भावना के अनुरूप नहीं हैं।

प्रमोद तिवारी ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों से छात्र-छात्राएं केजीएमयू में अध्ययन करने आते हैं। ऐसे में भोजन संबंधी व्यक्तिगत पसंद पर प्रतिबंध लगाने के बजाय संस्थान में रिक्त पदों को भरने, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और व्यवस्थागत सुधारों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह स्वयं शाकाहारी हैं, लेकिन किसी व्यक्ति के खानपान का निर्णय उसका व्यक्तिगत अधिकार है।

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उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को अपनी पसंद के अनुसार भोजन, पहनावे और आस्था की स्वतंत्रता प्रदान करता है। ऐसे में किसी शिक्षण संस्थान में भोजन को लेकर प्रतिबंध लगाने का निर्णय उचित नहीं माना जा सकता।

सोनम वांगचुक के अनशन पर भी जताई चिंता

प्रमोद तिवारी ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन पर भी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से संवाद स्थापित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जन आंदोलनों का समाधान बातचीत से निकाला जाना चाहिए और सरकार को इस दिशा में सकारात्मक पहल करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सोनम वांगचुक से स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अनशन समाप्त करने की भी अपील की।

ईरान मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट नीति की मांग

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने ईरान को लेकर अमेरिका की कड़ी चेतावनियों पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान युद्ध नहीं बल्कि कूटनीतिक संवाद से होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से भारत के राष्ट्रीय हितों और विदेश नीति के अनुरूप स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।

प्रमुख बातें

  • केजीएमयू के निर्णय पर उठाए सवाल
  • सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील
  • ईरान मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट रुख की मांग

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