सोशल मीडिया पोस्ट में धार्मिक आधार पर आरक्षण को लेकर उठाए सवाल, बयान पर तेज हुई राजनीतिक और सामाजिक चर्चा
पत्रकार सत्ता ब्यूरो
नई दिल्ली। पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. बी.पी. अशोक के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने धार्मिक आरक्षण और आरक्षण व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर लिखा, “धार्मिक आरक्षण तो बिना परीक्षा के मिलता है और 100% मिलता है, उनकी संख्या से तीस गुना ज्यादा।”
डॉ. बी.पी. अशोक का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उनके समर्थक इसे आरक्षण व्यवस्था और सरकारी नीतियों पर सवाल उठाने वाला बयान बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने इस दावे पर आपत्ति भी जताई है और तथ्यों के आधार पर इसकी समीक्षा की मांग की है।
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भारत में आरक्षण का विषय लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रहा है। संविधान के तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण की व्यवस्था है। वहीं, धार्मिक आधार पर आरक्षण का प्रश्न अलग-अलग राज्यों की नीतियों और न्यायालयों के निर्णयों के संदर्भ में समय-समय पर चर्चा में रहा है।
डॉ. अशोक की पोस्ट में किए गए “100 प्रतिशत” और “संख्या से तीस गुना ज्यादा” जैसे दावों की उन्होंने पोस्ट में कोई विस्तृत व्याख्या या आधिकारिक आंकड़े साझा नहीं किए हैं। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सकी है।
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यह मुद्दा सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है और विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाओं का इंतजार है।




