राम मंदिर प्रकरण पर फिर हमलावर हुए प्रमोद तिवारी, सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग

राम मंदिर प्रकरण पर प्रमोद तिवारी ने सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की

पत्रकार सत्ता
नई दिल्ली। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता और कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता प्रकरण को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर एक बार फिर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह मामला अब सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पहुंच चुका है और न्यायालय को इस पूरे प्रकरण में कठोर रुख अपनाना चाहिए।

प्रमोद तिवारी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा द्वारा चढ़ावे से जुड़े कथित मामले को कलंक बताए जाने के बाद इसकी गंभीरता और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

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कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि श्रीराम मंदिर का निर्माण सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आधार पर हुआ है और इसी कारण न्यायालय का दायित्व बनता है कि यदि मंदिर से जुड़े वित्तीय मामलों में कोई अनियमितता हुई है तो उस पर स्वतः संज्ञान लेकर उचित आदेश दे। उन्होंने मंदिर निर्माण और उससे जुड़े खर्चों को लेकर भी कई आरोप लगाए तथा कहा कि इनकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

प्रमोद तिवारी ने जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के पक्ष में भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया जाना आवश्यक है।

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उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर विपक्षी दलों के नेताओं को अपने साथ शामिल करने को लेकर भी कटाक्ष किया। तिवारी ने कहा कि जिन नेताओं पर पहले भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाते थे, वही बाद में भाजपा में शामिल होने पर निर्दोष बताए जाने लगते हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया।

समाचार में व्यक्त आरोप और विचार कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी के हैं। समाचार लिखे जाने तक भारतीय जनता पार्टी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अथवा संबंधित पक्ष की ओर से इन आरोपों पर कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई थी। यदि संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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