‘दर्द आपका है तो लड़ाई भी आपकी होगी’, मस्जिद-मदरसे और खानकाहों पर कथित कार्रवाई को लेकर सरकार पर तीखा हमला
पत्रकार सत्ता ब्यूरो
लखनऊ । आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने मुस्लिम समाज को लेकर एक बार फिर अपना सियासी रुख बेहद आक्रामक अंदाज में सामने रखा है। उन्होंने मुस्लिम समाज से अंबेडकरवादियों के साथ आने की अपील करते हुए कहा कि अगर समाज एकजुट होकर बाबा साहेब के विचारों की ताकत को समझे तो उसके अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ी जा सकती है।
चंद्रशेखर आजाद ने अपने संबोधन में कहा कि “अंबेडकरवादियों के साथ आ जाओ। साहब की शक्ति को समझकर देखो।” उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समाज के मस्जिद, मदरसे और खानकाहों को लेकर जो कथित जुल्म हो रहा है, उसे खत्म करने के लिए वह मजबूती से आवाज उठाएंगे।
‘बुलडोजर पर ताला मार देंगे’
चंद्रशेखर आजाद ने अपने बयान में बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “बुलडोजर पर ताला मार देंगे और इसी बुलडोजर को ठीक करके आपके लिए फूलों वाला ताज बना देंगे।”
उनके इस बयान को मुस्लिम समाज को अपने राजनीतिक आधार से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बयान ऐसे समय आया है जब आजाद लगातार संविधान, सामाजिक न्याय और वंचित तबकों के अधिकारों को अपने राजनीतिक अभियान का प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं।
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मुस्लिम समाज को साधने की कोशिश तेज
चंद्रशेखर आजाद का मुस्लिम समाज को लेकर यह रुख अचानक नहीं है। इससे पहले अप्रैल 2026 में लखनऊ में भी उन्होंने मुस्लिम समाज और डॉ. आंबेडकर के संबंधों को लेकर राजनीतिक टिप्पणी की थी।
वहीं जुलाई में उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और संविधान की रक्षा को लेकर संसद परिसर में विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार पर जोर दिया था। इन बयानों को जोड़कर देखें तो आजाद की राजनीति में दलित-मुस्लिम एकजुटता, संविधान और सामाजिक न्याय का मुद्दा लगातार प्रमुख होता दिखाई दे रहा है।
‘एक बार बाबा साहेब की ताकत समझो…’
अपने संबोधन में आजाद ने मुस्लिम समाज को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों की ताकत समझने का आह्वान किया। उनका संदेश साफ तौर पर राजनीतिक भागीदारी और अधिकारों की लड़ाई को सामाजिक गठजोड़ से जोड़ने वाला था।
चंद्रशेखर आजाद की यह रणनीति उत्तर प्रदेश की राजनीति में खास महत्व रखती है, जहां दलित और मुस्लिम मतदाताओं का चुनावी गणित कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाता है।
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क्या बन रहा है नया राजनीतिक समीकरण?
आजाद समाज पार्टी की ओर से दलित समाज के साथ पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़ने की कोशिश पहले से दिखाई देती रही है। ऐसे में मुस्लिम समाज को दिया गया यह ताजा संदेश आने वाले समय में नए राजनीतिक समीकरणों की जमीन तैयार कर सकता है।
हालांकि इस बयान के आधार पर किसी बड़े चुनावी गठबंधन या सीटों के समीकरण को लेकर अभी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि चंद्रशेखर आजाद मुस्लिम समाज के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने का स्पष्ट संदेश दे रहे हैं।
उनका यह बयान आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित-मुस्लिम एकजुटता बनाम मौजूदा राजनीतिक ध्रुवीकरण की बहस को और तेज कर सकता है।




