पूंजीवाद से समाजवाद की ओर परिवर्तन जरूरी : निहाल अहमद

पूंजीवाद से समाजवाद की ओर परिवर्तन जरूरी : निहाल अहमद

सपा नेता एवं मलिहाबाद से जिला पंचायत सदस्य ने कहा—गरीब, किसान, मजदूर, नौजवान और छोटे व्यापारियों के हितों को प्राथमिकता देने वाली व्यवस्था की जरूरत

ज़मीर हैदर । पत्रकार सत्ता
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के नेता एवं मलिहाबाद से जिला पंचायत सदस्य तथा जिला योजना समिति लखनऊ के सदस्य निहाल अहमद ने पूंजीवाद और समाजवाद को लेकर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान आर्थिक व्यवस्था में गरीब, मजदूर, किसान, छोटे व्यापारी, नौजवान और छात्रों के हितों को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने पूंजीवादी व्यवस्था से समाजवादी व्यवस्था की ओर परिवर्तन को आवश्यक बताया।

निहाल अहमद ने कहा कि किसान खेतों में मेहनत करता है, मजदूर कारखानों में काम करता है, छात्र शिक्षा हासिल करने के लिए प्रयासरत हैं, जबकि नौजवान रोजगार की तलाश में भटकते हैं और छोटे व्यापारी अपने कारोबार के जरिए परिवार चलाने की कोशिश करते हैं। उनके अनुसार आर्थिक नीतियों में इन वर्गों के हितों को केंद्र में रखा जाना चाहिए।

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उन्होंने बड़े कॉरपोरेट और ऑनलाइन व्यापार के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेजन, फ्लिपकार्ट और वॉलमार्ट जैसी बड़ी कंपनियों के विस्तार से छोटे व्यापारियों के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौतियां बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले, कारीगर और स्वरोजगार से जुड़े लोगों के लिए बाजार में अवसर और संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

समाजवाद को लेकर निहाल अहमद की अवधारणा

निहाल अहमद ने कहा कि उनके विचार में समाजवाद का उद्देश्य उत्पादन और संसाधनों पर समाज के व्यापक हित को प्राथमिकता देना है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को उनके श्रम का उचित अधिकार, किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और छोटे व्यापारियों एवं स्वरोजगार से जुड़े लोगों को बाजार में संरक्षण मिलना चाहिए।

उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक अधिकार बताते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में आम लोगों की पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और रोजगार को केवल निजी क्षेत्र पर निर्भर नहीं रहने देने की बात कही।

निहाल अहमद ने कहा कि समानता, बंधुत्व, आत्मनिर्भरता और सामाजिक न्याय पर आधारित व्यवस्था में गरीब, किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान और छोटे व्यापारियों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि आर्थिक नीतियों में स्थानीय बाजार, छोटे कारोबार, किसानों और श्रमिकों की भूमिका को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिसमें संसाधनों और आर्थिक अवसरों तक व्यापक समाज की पहुंच हो।

ब्यरो रिपोर्ट, लखनऊ

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