लखनऊ | पत्रकार सत्ता ब्यूरो
पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. बी.पी. अशोक ने संविधान में आरक्षण की समय-सीमा को लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण के संबंध में अनुच्छेद 335 के तहत किसी प्रकार की समय-सीमा न कभी थी और न ही वर्तमान में है।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि लोकसभा और विधानसभा में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए राजनीतिक आरक्षण की समय-सीमा अनुच्छेद 334 में निर्धारित की गई थी, जबकि नौकरियों में आरक्षण से जुड़े प्रावधान अलग हैं। उनके अनुसार, दोनों प्रकार के आरक्षण को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति पैदा की जाती है।
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डॉ. बी.पी. अशोक ने लिखा, “संविधान में Article 335 में नौकरियों वाले आरक्षण के दावों की समय सीमा कभी नहीं थी, न है। Article 330 और 332 के लोकसभा और विधानसभा के राजनीतिक आरक्षण की समय सीमा Article 334 में थी। इतनी सी बात समझ क्यों नहीं आती।”
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब आरक्षण और उससे जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर लगातार बहस जारी है। हालांकि, यह डॉ. बी.पी. अशोक का व्यक्तिगत संवैधानिक दृष्टिकोण है और इस पर किसी सरकारी संस्था या न्यायालय की नई टिप्पणी सामने नहीं आई है।
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