क्या मोदी सरकार में कमजोर हुआ भारतीय पासपोर्ट? कांग्रेस के दावे की पड़ताल में सामने आई पूरी तस्वीर

भारतीय पासपोर्ट रैंकिंग पर कांग्रेस के दावे की फैक्ट चेक रिपोर्ट

शबीह हैदर
फैक्ट चेक | पत्रकार सत्ता
नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत का पासपोर्ट वैश्विक स्तर पर कमजोर हुआ है। पोस्ट में कहा गया कि 2014 में भारतीय पासपोर्ट की रैंक 76 थी, जो 2026 में घटकर 125 हो गई है। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस दावे को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

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पत्रकार सत्ता ने इस दावे की तथ्यात्मक जांच की और पाया कि यह दावा पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन अधूरी जानकारी पर आधारित है।

कांग्रेस का दावा क्या है?

कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में लिखा कि—

  • 2014 : भारत की पासपोर्ट रैंक – 76
  • 2026 : भारत की पासपोर्ट रैंक – 125

पोस्ट के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि मोदी सरकार के दौरान भारतीय पासपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय ताकत कमजोर हुई है।

पासपोर्ट रैंकिंग कैसे तय होती है?

विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया में पासपोर्ट की कोई एक सार्वभौमिक रैंकिंग नहीं होती। कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अलग-अलग मानकों पर Passport Index जारी करती हैं। इनमें प्रमुख हैं—

  • Global Passport Index
  • Henley Passport Index
  • Passport Index (Arton Capital)

इन सभी संस्थाओं की गणना का तरीका अलग है। कोई वीज़ा-फ्री देशों की संख्या को प्राथमिकता देता है तो कोई अन्य यात्रा सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता के आधार पर अंक देता है। इसलिए अलग-अलग इंडेक्स में किसी देश की रैंक अलग हो सकती है।

125वीं रैंक का आधार क्या है?

पत्रकार सत्ता की पड़ताल में सामने आया कि कांग्रेस द्वारा साझा किया गया 125वां स्थान Global Passport Index की रैंकिंग से मेल खाता है। इस इंडेक्स के अनुसार भारत 2026 में 125वें स्थान पर है। अर्थात कांग्रेस ने जो आंकड़ा दिया है, उसका एक स्रोत मौजूद है। लेकिन दूसरी रिपोर्टें कुछ और कहती हैं

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  • यदि दुनिया में सबसे अधिक उद्धृत Henley Passport Index की बात करें तो भारत की स्थिति इससे बेहतर दिखाई देती है।
  • Henley Passport Index के अनुसार भारत वर्तमान में लगभग 80वें स्थान के आसपास है और भारतीय नागरिक दर्जनों देशों में वीज़ा-फ्री या वीज़ा-ऑन-अराइवल सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
  • वहीं Passport Index (Arton Capital) भारत को इससे भी बेहतर, लगभग 66वें स्थान पर दर्शाता है।
  • यानी अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों में भारत की रैंक अलग-अलग है।
  • क्या 2014 और 2026 की तुलना उचित है?
  • यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
  • यदि 2014 और 2026 के आंकड़े एक ही संस्था के Passport Index से लिए गए हों तो तुलना की जा सकती है।
  • लेकिन यदि दोनों वर्षों के आंकड़े अलग-अलग इंडेक्स से लिए गए हों तो यह तुलना भ्रामक मानी जाएगी।
  • कांग्रेस की पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि 2014 और 2026 के लिए किस संस्था के आंकड़ों का उपयोग किया गया है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि किसी देश के पासपोर्ट की रैंक केवल सरकार की विदेश नीति से तय नहीं होती। इसमें कई अन्य कारक भी शामिल होते हैं, जैसे—

  • विभिन्न देशों के साथ वीज़ा समझौते
  • कूटनीतिक संबंध
  • सुरक्षा मानक
  • वैश्विक यात्रा नियम
  • आव्रजन नीतियां

इसलिए केवल एक रैंकिंग के आधार पर किसी सरकार की विदेश नीति का अंतिम मूल्यांकन करना उचित नहीं माना जाता।

पत्रकार सत्ता का विश्लेषण

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कांग्रेस का 125वीं रैंक वाला दावा पूरी तरह निराधार नहीं है, क्योंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय Passport Index पर आधारित है। लेकिन यह कहना कि “भारतीय पासपोर्ट की यही वास्तविक वैश्विक रैंक है”, सही नहीं होगा। अन्य प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रैंकिंग भारत को इससे काफी बेहतर स्थान पर रखती है। इसलिए कांग्रेस की पोस्ट में महत्वपूर्ण संदर्भों का अभाव है और पाठकों के सामने पूरी तस्वीर प्रस्तुत नहीं की गई है।

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फैक्ट चेक निष्कर्ष (Verdict)

🟡 निर्णय : आंशिक रूप से सही (Partly True)

✅ भारत की 125वीं रैंक एक अंतरराष्ट्रीय Passport Index में दर्ज है।
✅ लेकिन सभी प्रमुख वैश्विक Passport Index भारत को 125वें स्थान पर नहीं रखते।
✅ इसलिए कांग्रेस का दावा आंशिक रूप से सही, लेकिन संदर्भ के बिना अधूरा है।

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