‘सीता मां को चुराने वाला भी भेष बदलकर आया था’, अखिलेश यादव का BJP पर तीखा हमला

अखिलेश यादव का BJP पर हमला, बोले- ‘सीता मां को चुराने वाला भी भेष बदलकर आया था’

बोले- ऐसे लोगों से सावधान रहिए, भाजपा को बताया ‘अधर्मी गिरोह’; जातीय जनगणना और गरीबों के हक का भी उठाया मुद्दा

पत्रकार सत्ता ब्यूरो
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। राम मंदिर से जुड़े दान और कथित चोरी के मुद्दे का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि “पूरा देश जानता है, सीता मां को चुराने वाला भी भेष बदलकर आया था, इसलिए ऐसे लोगों से सावधान रहिए।” उन्होंने भाजपा को ‘अधर्मी गिरोह’ बताते हुए मंदिर और धर्म के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया।

अखिलेश यादव ने कहा कि मंदिरों के बाहर बड़ी संख्या में लोग भिक्षा मांगते हैं, लेकिन भिखारी भी मंदिर के अंदर चोरी नहीं करता। उन्होंने मंदिर से जुड़े कथित मामलों को गंभीर बताते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों को सामान्य चोरी के तौर पर नहीं देखा जा सकता। उनके बयान के बाद यूपी की राजनीति में भाजपा और सपा के बीच जुबानी जंग तेज होने के आसार हैं।

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‘लूट का पैसा गरीबों के काम आएगा’

अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर सरकारी संसाधनों की कथित लूट और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हो रही ‘लूट’ को रोककर उस धन का इस्तेमाल गरीबों के हित में किया जाएगा। उन्होंने सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर भी भाजपा सरकार पर सवाल खड़े किए।

तीन महीने में जातीय जनगणना का दावा

सपा अध्यक्ष ने जातीय जनगणना को भी अपने संबोधन का प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर तीन महीने के भीतर जातीय जनगणना कराने का काम किया जाएगा। उनका कहना है कि आबादी के अनुपात में लोगों को अधिकार, सम्मान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

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खंगार समाज को राजनीतिक सम्मान देने का वादा

अखिलेश यादव ने महाराजा खेत सिंह खंगार का जिक्र करते हुए खंगार समाज को राजनीतिक सम्मान और प्रतिनिधित्व देने की बात कही। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर समाज के लोगों को राजनीतिक रूप से उचित स्थान दिया जाएगा।

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अखिलेश यादव के इन बयानों को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। राम मंदिर, सामाजिक न्याय, जातीय जनगणना और गरीबों के मुद्दे के जरिए सपा नेतृत्व भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

ब्यूरो रिपोर्ट, लखनऊ

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