सेप्सिस पर KGMU का बड़ा अलर्ट: हर मिनट की देरी पड़ सकती है भारी, सही समय पर इलाज से बच सकती है जान

KGMU का अलर्ट: सेप्सिस में हर मिनट महत्वपूर्ण

पत्रकार सत्ता ब्यूरो
लखनऊ। संक्रमण से उत्पन्न होने वाली गंभीर और जानलेवा स्थिति सेप्सिस को लेकर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग ने गंभीर चेतावनी जारी की है। विश्व सेप्सिस दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में विशेषज्ञों ने कहा कि सेप्सिस के मामले में हर मिनट महत्वपूर्ण है और संक्रमण की समय रहते पहचान तथा सही उपचार से मरीज की जान बचाई जा सकती है। इस वर्ष की थीम “सेप्सिस में निवेश करें–जानें बचाएं” रखी गई है।

हर 3 सेकंड में एक मौत का दावा

प्रेस विज्ञप्ति में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, सेप्सिस जैसी गंभीर बीमारी से विश्व स्तर पर प्रत्येक तीन सेकंड में एक व्यक्ति की मौत होने का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज में कहा गया है कि सेप्सिस हर साल करोड़ों लोगों को प्रभावित करता है और इसके कारण होने वाली मौतें वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि सही एंटीबायोटिक, सही डोज और सही समय तक उपचार मरीज के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जबकि दवाओं के गलत उपयोग से ड्रग-रेसिस्टेंट संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है।

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क्या है सेप्सिस और किन लोगों को ज्यादा खतरा?

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सेप्सिस एक जटिल और जीवन-घातक स्थिति है, जो संक्रमण के प्रति शरीर की असामान्य प्रतिक्रिया के कारण व्यापक सूजन और ऊतक क्षति पैदा कर सकती है। बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी संक्रमण इसके कारण बन सकते हैं। कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग, बुजुर्ग, नवजात एवं छोटे बच्चे तथा कई पुरानी बीमारियों से पीड़ित मरीज अधिक जोखिम में हो सकते हैं।

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इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

विशेषज्ञों के अनुसार सेप्सिस तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। इसके प्रमुख संकेतों में तेज या असामान्य बुखार, हृदय गति बढ़ना, तेजी से सांस लेना या सांस फूलना, भ्रम की स्थिति, रक्तचाप कम होना, सांस लेने में कठिनाई और शरीर के अंगों के कामकाज में कमी जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में यह सेप्टिक शॉक का रूप ले सकता है, जो जानलेवा आपातकाल है।

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12 और 13 सितंबर को KGMU में दो दिवसीय सम्मेलन

विश्व सेप्सिस दिवस के अवसर पर KGMU के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा ‘पल्मोक्रिट फाउंडेशन’, सोसाइटी ऑफ प्रिसिजन मेडिसिन एंड इंटेंसिव केयर तथा नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (उत्तर प्रदेश चैप्टर) के सहयोग से 12 और 13 सितंबर 2026 को दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच सेप्सिस प्रबंधन को लेकर जागरूकता बढ़ाना और बेहतर उपचार पद्धतियों पर मंथन करना है।

उद्घाटन समारोह में अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य डॉ. अमित कुमार घोष सहित अन्य प्रमुख अधिकारी और विशेषज्ञों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश सहित KGMU के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने सेप्सिस की शीघ्र पहचान, उचित एंटीबायोटिक उपयोग और प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया।

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