मस्जिद तोड़ने से न इस्लाम मिटेगा, न किसानों का गन्ना बकाया मिलेगा: निहाल अहमद

सहारनपुर मस्जिद विवाद पर निहाल अहमद का हमला, गन्ना बकाये पर भी उठाए सवाल

सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद को लेकर सपा नेता ने सरकार पर साधा निशाना, महंगाई और बेरोजगारी को बताया असली मुद्दा

ज़मीर हैदर। पत्रकार सत्ता ब्यूरो
सहारनपुर/लखनऊ। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता एवं जिला पंचायत सदस्य निहाल अहमद ने मस्जिद को गिराने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि “मस्जिद तोड़ने से न इस्लाम मिटेगा और न ही हिंदुओं का कोई भला होगा।” उन्होंने कहा कि सरकार को धार्मिक मुद्दों के बजाय किसानों के गन्ना भुगतान, महंगाई और बेरोजगारी जैसे सवालों पर जवाब देना चाहिए।

निहाल अहमद के मुताबिक, उक्त मस्जिद 1911 से पहले की बताई जाती है और इसके मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। उनका दावा है कि दस्तावेजों में मिल्कियत वहीद खान और याकूब खान के नाम दर्ज है तथा सुनवाई के दौरान संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। इसके बावजूद सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से मस्जिद गिराने का आदेश दिए जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई।

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उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक स्थल को गिराने या नमाज पढ़ने के मामले दर्ज करने से किसी धर्म का अस्तित्व समाप्त नहीं किया जा सकता। निहाल अहमद ने अपने बयान में ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि बाहरी दबाव के बावजूद इस्लाम समाप्त नहीं हुआ और न ही धार्मिक आस्था को इस तरह खत्म किया जा सकता है।

अखिलेश यादव के बयान का भी किया जिक्र

सपा नेता ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें दूसरे धर्मों की आस्था और सम्मान को सनातन मूल्यों से जोड़ते हुए बात कही गई है। उन्होंने कहा कि धार्मिक विवादों के बीच जनता के वास्तविक मुद्दे पीछे छूट रहे हैं।

गन्ना भुगतान को लेकर सरकार पर सवाल

निहाल अहमद ने सहारनपुर, शामली और मुजफ्फरनगर क्षेत्र में गन्ना किसानों के भुगतान का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र के किसानों का ₹1,936 करोड़ गन्ना भुगतान बकाया है और किसान भुगतान के लिए परेशान हैं। उनका कहना है कि जिस कलेक्ट्रेट में मस्जिद को लेकर कार्रवाई हो रही है, उसी के बाहर किसान अपने बकाये की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं।

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उन्होंने महंगाई और बेरोजगारी को भी प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि डीजल, खाद, कीटनाशक, राशन, फीस और बिजली जैसी जरूरतों की बढ़ती लागत से आम परिवार प्रभावित है। वहीं रोजगार की तलाश में युवा दूसरे राज्यों और शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।

कानूनी प्रावधानों का दिया हवाला

निहाल अहमद ने प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 और सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2024 के बुलडोजर कार्रवाई संबंधी फैसले का हवाला देते हुए कार्रवाई पर कानूनी सवाल उठाए। हालांकि, इन दोनों कानूनी दावों और सहारनपुर मस्जिद पर लागू होने वाले प्रावधानों की स्थिति को प्रकाशित करने से पहले आधिकारिक आदेश/दस्तावेजों से सत्यापित किया जाना उचित होगा।

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज का हित मस्जिद तोड़ने में नहीं, बल्कि शिक्षा और आर्थिक मजबूती में है। उनका कहना था कि धार्मिक विवादों के बजाय किसान, बेरोजगार युवा और महंगाई से जूझ रहे परिवारों के मुद्दों पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।

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निहाल अहमद ने कहा कि जब तक किसान गन्ने के भुगतान, युवा रोजगार और आम आदमी महंगाई की समस्या से जूझता रहेगा, तब तक धार्मिक मुद्दों की राजनीति से जनता की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

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