साइबर ठगों से बचाव में सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

साइबर ठगों से बचाव: सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कस्टमर केयर, यूपीआई और फिशिंग के जरिए हो रही ठगी से रहें सावधान : निर्भय सक्सेना

निर्भय सक्सेना
बरेली। ऑनलाइन कारोबार और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने के साथ साइबर ठगी के मामले भी सामने आ रहे हैं। थोड़े से लालच, जल्दबाजी या जानकारी के अभाव में लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं। विशेष रूप से बुजुर्ग और महिलाएं डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी का शिकार बन रही हैं। ऐसे में साइबर अपराध से बचने के लिए सतर्कता और जागरूकता बेहद जरूरी है।

यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे घबराने के बजाय तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करना चाहिए। इसके साथ ही नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, ठगी की रकम को रोकने या फ्रीज कराने की संभावना उतनी ही बेहतर रहती है।

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यूपी में हर जिले में साइबर थाना

उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध से निपटने के लिए पिछले वर्षों में पुलिस व्यवस्था को मजबूत किया गया है। अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा सामान्य पुलिस थानों में भी साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है। लखनऊ में प्रदेश का मुख्य साइबर क्राइम मुख्यालय स्थित है।

वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध से जुड़े मामलों के लिए केवल दो साइबर थाने होने की बात सामने आती रही है। इसके बाद साइबर अपराध की बढ़ती चुनौती को देखते हुए जिला स्तर पर व्यवस्था का विस्तार किया गया।

बरेली में ‘साइबर ठगों’ पर बड़ी कार्रवाई

बरेली पुलिस ने जुलाई 2026 में चलाए गए विशेष अभियान ‘साईं-वज्र’ के तहत साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। पुलिस के अनुसार अभियान में 58 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर करीब 1.67 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा किया गया। कार्रवाई के दौरान करीब 26.49 लाख रुपये नकद, 69 मोबाइल फोन और एटीएम कार्ड बरामद किए जाने की जानकारी दी गई।

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अप्रैल 2026 में भी बरेली पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया था। जांच में गिरोह के तार चीन और नेपाल तक जुड़े होने की बात सामने आई थी। आरोपियों पर एपीके फाइल भेजकर मोबाइल में सेंध लगाने और बैंक खातों से रकम निकालने का आरोप था।

चेक का क्लोन बनाकर ठगी की कोशिश

साइबर ठगी का तरीका केवल ऑनलाइन लिंक और मोबाइल तक सीमित नहीं है। बरेली में एक ऑटो कारोबारी द्वारा धार्मिक चंदे के लिए दिए गए बैंक चेक का कथित क्लोन बनाकर बड़ी रकम का चेक बैंक में लगाने का मामला भी सामने आया था। बैंक खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने के कारण कारोबारी बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी से बच गया। कारोबारी ने इसकी शिकायत बैंक में की थी।

डिजिटल अरेस्ट से लेकर फर्जी कस्टमर केयर तक

साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। इनमें डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाना, फर्जी कस्टमर केयर नंबर, फिशिंग लिंक, ऑनलाइन गेमिंग, एल्गो ट्रेडिंग के नाम पर निवेश का लालच और मोबाइल में संदिग्ध एपीके फाइल डाउनलोड करवाना प्रमुख हैं।

फिशिंग में अपराधी बैंक या किसी विश्वसनीय संस्था के नाम से फर्जी ई-मेल, संदेश या लिंक भेजकर ओटीपी, पासवर्ड और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।

रैंसमवेयर के जरिए कंप्यूटर या मोबाइल की फाइलों को लॉक कर उनसे दोबारा पहुंच देने के बदले पैसे मांगे जा सकते हैं।

पहचान की चोरी में किसी व्यक्ति की निजी जानकारी या पहचान संबंधी दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया जाता है। वहीं साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, हैकिंग और मैलवेयर के जरिए भी लोगों को निशाना बनाया जाता है।

ठगी होते ही क्या करें?

यदि आपके बैंक खाते से रकम निकल गई है या आप ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं तो तुरंत:

  • 1930 पर कॉल करें।
  • राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
  • नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल को सूचना दें।
  • बैंक को तत्काल जानकारी देकर खाते/कार्ड को सुरक्षित कराएं।
  • ट्रांजैक्शन आईडी, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट, मोबाइल नंबर और संदिग्ध संदेश सुरक्षित रखें।
  • ठगी के बाद अपराधियों से दोबारा संपर्क कर रकम वापस दिलाने के नाम पर किसी को पैसा न दें।

शिकायत दर्ज कराने के बाद मिलने वाली पावती संख्या को सुरक्षित रखें। आगे की कार्रवाई और शिकायत की स्थिति जानने में यह उपयोगी होती है।

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साइबर अपराध का बढ़ता दायरा

साइबर अपराध में कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट या किसी डिजिटल नेटवर्क के जरिए की जाने वाली विभिन्न अवैध गतिविधियां शामिल हैं। डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं।

कुछ रिपोर्टों में उत्तर प्रदेश में साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों की संख्या अधिक होने की बात सामने आती है, जबकि तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में साइबर अपराध की दर अधिक होने का उल्लेख मिलता है। इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं के व्यापक इस्तेमाल वाले क्षेत्रों में साइबर अपराध के मामले अधिक दर्ज होना भी एक कारण माना जाता है।

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फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के हवाले से देश के अधिकांश साइबर अपराध कुछ चुनिंदा जिलों से संचालित होने का दावा किया गया है। हालांकि ऐसे आंकड़ों को संबंधित आधिकारिक सरकारी आंकड़ों से मिलान करके ही अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित होगा।

साइबर अपराध से बचने का सबसे आसान तरीका है—अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें और किसी भी संदिग्ध कॉल पर घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें।

निर्भय सक्सेना
उत्तर प्रदेश शासन से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार

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