पत्रकार सत्ता। डिजिटल डेस्क
अलवर । राजस्थान के अलवर जिले के जोधावास गांव में सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति के खिलाफ छात्र-छात्राओं का आंदोलन आखिरकार रंग लाया। जर्जर भवन, शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से नाराज विद्यार्थियों ने स्कूल में तालाबंदी कर धरना दिया। आंदोलन के दबाव के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल में 7 शिक्षकों की अस्थायी तैनाती की, जबकि प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच जर्जर भवन को हटाने सहित कई मांगों पर सहमति बनी है।
मामला थानागाजी क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जोधावास का है। बुधवार को स्कूल की जर्जर इमारत की छत का एक हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया। गनीमत रही कि जिस समय यह हादसा हुआ, वहां कोई विद्यार्थी या शिक्षक मौजूद नहीं था। इसके बाद विद्यार्थियों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने स्कूल की जर्जर इमारत को तत्काल हटाने और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया।
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“अगर आपके बच्चे होते, तो क्या आप ऐसी सुविधा देते?”
प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा का सवाल व्यवस्था की बदहाली पर सीधा प्रहार करता नजर आया। छात्रा ने कहा—“अगर आपके बच्चे होते, तो क्या आप उन्हें ऐसी ही सुविधा देते?” इस सवाल में स्कूल की जर्जर हालत, शिक्षकों की कमी और विद्यार्थियों की परेशानी साफ दिखाई देती है। उपलब्ध वीडियो में भी छात्र-छात्राओं को स्कूल की समस्याओं को लेकर आवाज उठाते देखा जा सकता है।
विद्यार्थियों के मुताबिक स्कूल में करीब 174 बच्चे पढ़ते हैं, जबकि पर्याप्त कक्षों और शिक्षकों का अभाव है। बारिश के दौरान उपलब्ध कमरों में भी पानी टपकने की शिकायत है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ऐसे माहौल में पढ़ाई के साथ बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में है।
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7 शिक्षक लगाए, लेकिन सवाल अभी बाकी
छात्रों के आंदोलन के बाद शिक्षा विभाग ने कमी को देखते हुए स्कूल में 7 शिक्षकों की अस्थायी तैनाती की। हालांकि विद्यार्थियों और ग्रामीणों की मांग केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं थी। वे जर्जर भवन को हटाने, नया भवन बनाने और स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की मांग कर रहे थे।
रिपोर्टों के अनुसार स्कूल की जर्जर इमारत पहले ही असुरक्षित घोषित की जा चुकी थी। इसके बावजूद वहां पढ़ाई जारी रहने को लेकर विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने सवाल उठाए। छत का हिस्सा गिरने के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया कि यदि उस समय बच्चे वहां मौजूद होते तो क्या होता।
दो दिन के आंदोलन के बाद प्रशासन झुका
लगातार दो दिन चले आंदोलन के बाद प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच सहमति बनी। विद्यार्थियों ने अपनी मांगों का ज्ञापन कार्यवाहक उपखंड अधिकारी पिंकी गुर्जर और पुलिस उप अधीक्षक इंदु लोधी को सौंपा। राजस्थान पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार जर्जर भवनों को तीन दिन में गिराने पर सहमति बनी, जिसके बाद विद्यार्थियों ने धरना समाप्त कर दिया।
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अलवर की यह घटना केवल एक सरकारी स्कूल की बदहाली की कहानी नहीं है। यह उस नई पीढ़ी की आवाज भी है जो अपनी शिक्षा, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल पूछ रही है। Gen Alpha के इन बच्चों का सवाल अब व्यवस्था के सामने है—जब सरकार और अधिकारियों के अपने बच्चे ऐसे स्कूल में पढ़ते, तो क्या वे भी इसी तरह की सुविधाओं को स्वीकार करते?
शिक्षा बच्चों पर एहसान नहीं, उनका अधिकार है। अब देखना यह है कि प्रशासन द्वारा किए गए वादे जमीन पर कितनी जल्दी पूरे होते हैं और जोधावास के बच्चों को सुरक्षित भवन और पर्याप्त शिक्षकों के साथ बेहतर शिक्षा कब मिलती है।




