आंखों की सुरक्षा और उपचार में सावधानी जरूरी

आंखों की सुरक्षा और उपचार में सावधानी जरूरी: डॉ. अजय शर्मा

लेखक : डॉ. अजय शर्मा
आंखें मनुष्य को ईश्वर की अनुपम देन हैं। इनका महत्व वही व्यक्ति बेहतर समझ सकता है, जिसने जन्म से दृष्टि न देखी हो अथवा किसी बीमारी, दुर्घटना या अन्य कारण से अपनी नेत्र ज्योति खो दी हो। इसलिए मेरी दृष्टि में आंखों की सुरक्षा को लेकर थोड़ी-सी भी लापरवाही भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

आंखों को तेज रोशनी, धूल, धुएं और अन्य प्रदूषकों से यथासंभव बचाना चाहिए। यदि आंख में धूल या कोई बाहरी कण चला जाए तो उसे रगड़ना नहीं चाहिए। साफ पानी से आंखों को धोकर राहत पाने का प्रयास किया जा सकता है। यदि परेशानी बनी रहे, आंख लाल हो जाए, दर्द हो या दृष्टि प्रभावित होने लगे तो बिना देर किए नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।

मेरे विचार से आंखों के मामले में स्वयं चिकित्सक बनने की आदत सबसे अधिक नुकसानदायक हो सकती है। आंखों में काजल, सुरमा, गुलाबजल या किसी भी प्रकार की दवा अथवा घरेलू उपचार का प्रयोग करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। विशेष रूप से आंखों में संक्रमण होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के कोई आई ड्रॉप या दवा इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए।

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दृष्टि कमजोर होने, लगातार सिरदर्द, आंखों में दर्द, जलन, धुंधला दिखाई देने या प्रकाश के प्रति असहजता जैसी समस्या होने पर समय रहते आंखों की जांच करानी चाहिए। चिकित्सक की सलाह से उपयुक्त चश्मे का इस्तेमाल करने से दैनिक जीवन में होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकता है। बच्चों की आंखों की नियमित जांच पर भी अभिभावकों को विशेष ध्यान देना चाहिए।

आई फ्लू या कंजक्टिवाइटिस जैसे संक्रमण के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। संक्रमित व्यक्ति को अपना तौलिया, रूमाल, तकिया या अन्य व्यक्तिगत वस्तुएं दूसरों के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। आंखों को बार-बार छूने से बचना और हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को संक्रमण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और नेत्र विशेषज्ञ की सलाह का पालन करना चाहिए।

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आंखों के स्वास्थ्य के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार भी महत्वपूर्ण है। हरी सब्जियां, ताजे फल और मेवे जैसे बादाम एवं अखरोट संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। साथ ही मधुमेह और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक अनियंत्रित रक्त शर्करा और रक्तचाप आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

मेरी व्यक्तिगत राय है कि आंखों की समस्या को कभी भी मामूली समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। किसी भी बीमारी में घरेलू नुस्खों या अप्रमाणित दवाओं के भरोसे इलाज करने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना अधिक सुरक्षित है। आंखें अत्यंत संवेदनशील अंग हैं, इसलिए इनकी सुरक्षा में सावधानी ही सबसे महत्वपूर्ण उपाय है।

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लेखक परिचय:

लेखक परिचय: डॉ. अजय शर्मा लोकतंत्र सेनानी कल्याण मंच के अध्यक्ष हैं तथा भावराव देवरस सेवा न्यास के चिकित्सा सलाहकार है
लेखक परिचय: डॉ. अजय शर्मा लोकतंत्र सेनानी कल्याण मंच के अध्यक्ष हैं तथा भावराव देवरस सेवा न्यास के चिकित्सा सलाहकार है

नोट: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक डॉ. अजय शर्मा के निजी विचार हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्या में योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

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