1 अगस्त होता है विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस
लखनऊ | पत्रकार सत्ता ब्यूरो
विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस (1 अगस्त) के अवसर पर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग ने लोगों से फेफड़ों के कैंसर के प्रति जागरूक रहने और समय पर जांच कराने की अपील की है। विभाग ने कहा कि शुरुआती पहचान से इस गंभीर बीमारी का प्रभावी इलाज संभव है।
विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान है, जो लगभग 85 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा सेकेंडहैंड स्मोक, वायु प्रदूषण, रेडॉन गैस, एस्बेस्टस और आनुवंशिक कारण भी जोखिम बढ़ाते हैं।
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प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत में हर वर्ष लगभग 67 हजार नए फेफड़ों के कैंसर के मामले सामने आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बीमारी का शुरुआती चरण में पता चल जाए तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। हाई-रिस्क लोगों के लिए लो-डोज़ CT स्कैन प्रभावी जांच विकल्प माना गया है।

डॉक्टरों ने लगातार खांसी, खांसी में खून आना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, आवाज बैठना, तेजी से वजन घटना और बार-बार संक्रमण जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है। साथ ही धूम्रपान छोड़ने, प्रदूषण से बचने, नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाने पर भी जोर दिया गया।
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KGMU ने बताया कि संस्थान में फेफड़ों के कैंसर की जांच और उपचार के लिए ब्रोंकोस्कोपी, EBUS, थोराकोस्कोपी, कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।




