लखनऊ, (पत्रकार सत्ता सिटी रिपोर्टर)। मुहर्रम की 7वीं तारीख पर मंगलवार को राजधानी लखनऊ में अज़ादारी का सिलसिला और तेज हो गया। ऐतिहासिक बड़े इमामबाड़े समेत विभिन्न इमामबाड़ों में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने मजलिसों में शिरकत की। इमाम हुसैन और करबला के शहीदों की याद में मातम, नौहाख्वानी और मर्सियाख्वानी का आयोजन हुआ।
7 मुहर्रम से आशूरा की तैयारियां और तेज हो जाती हैं। धार्मिक विद्वानों ने मजलिसों में करबला की घटना का वर्णन करते हुए इंसाफ, सब्र और इंसानियत का संदेश दिया। बड़ी संख्या में लोगों ने मातम कर इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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अब 8 और 9 मुहर्रम को विशेष मजलिसें तथा मातमी कार्यक्रम होंगे। वहीं 10 मुहर्रम (आशूरा) पर पारंपरिक मातमी जुलूस निकाले जाएंगे। ताज़िए, अलम और अन्य धार्मिक प्रतीकों के साथ इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाएगा।
मुहर्रम के मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और कानून-व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और लोगों से शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई है।




