ओबीसी की राजनीतिक भागीदारी और मंडल आयोग की लंबित सिफारिशों को लागू करने की उठेगी मांग
पत्रकार सत्ता ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को साधने के लिए ‘मंडल जन चेतना आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य मंडल आयोग की लंबित सिफारिशों को लागू कराने और सामाजिक न्याय के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाना है।
पार्टी के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत 7 अगस्त को लखनऊ स्थित मान्यवर कांशीराम ईको गार्डन से होगी। इसकी अगुवाई स्वयं चंद्रशेखर आजाद करेंगे। प्रदेशभर से आज़ाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा गया है। आंदोलन का प्रमुख नारा है— “मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करो, वरना कुर्सी खाली करो।”
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क्या है मंडल आयोग?
मंडल आयोग का गठन वर्ष 1979 में तत्कालीन जनता पार्टी सरकार ने बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल की अध्यक्षता में किया था। आयोग ने 1980 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण सहित कई सिफारिशें की थीं। इनमें सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए भी कई सुझाव शामिल थे।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी प्रमुख मुद्दा
आज़ाद समाज पार्टी का कहना है कि मंडल आयोग की कई महत्वपूर्ण सिफारिशें अब भी पूरी तरह लागू नहीं हुई हैं। पार्टी विशेष रूप से ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर राष्ट्रीय बहस की मांग कर रही है। वर्तमान में संसद और विधानसभाओं में आरक्षण केवल अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए है। ओबीसी के लिए राजनीतिक आरक्षण का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है और इसके लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता होगी।
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चुनावी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा आंदोलन
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दलित और मुस्लिम समाज के बीच सक्रियता के बाद चंद्रशेखर आजाद अब ओबीसी वर्ग को भी अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह आंदोलन सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों की राजनीति को नई दिशा देने का प्रयास माना जा रहा है।




