शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कांग्रेस का बयान
लखनऊ। पत्रकार सत्ता
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, राज्यसभा सांसद एवं नेता प्रतिपक्ष (राज्यसभा) प्रमोद तिवारी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र, युवाओं और विपक्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि देशभर में छात्रों और युवाओं के आंदोलन के बाद आया यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि लोकतांत्रिक दबाव के सामने सरकार को भी झुकना पड़ा।
प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की अनेक घटनाएं सामने आईं, जिससे देश के लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को उठाती रही और छात्रों के आंदोलन को समर्थन देती रही। उनके अनुसार शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पहले ही पद छोड़ देना चाहिए था।
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उन्होंने कहा कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री पहले ही इस्तीफा देना चाहते थे, तो फिर उन्होंने शुरुआत में ऐसा क्यों नहीं किया। तिवारी ने दावा किया कि सरकार ने लंबे समय तक उन्हें पद पर बनाए रखा और अंततः बढ़ते जनदबाव तथा विपक्ष की आवाज के बाद इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने इसे सरकार की मजबूरी बताया।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह घटनाक्रम केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता और युवाओं की आवाज की ताकत को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि देश का युवा अपने अधिकारों और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है और इस संघर्ष को सफलता मिली है।
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उन्होंने किसानों और युवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में विभिन्न मुद्दों पर जनता की आवाज लगातार बुलंद हो रही है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व, विपक्षी दलों और आंदोलन में शामिल युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनमत का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।




