दानिश अंसारी ने की हिंदू प्रतिनिधित्व की पैरवी कांग्रेस ने मंदिर ट्रस्ट में भी समान व्यवस्था की उठाई मांग
Highlights
● वक्फ बोर्ड को लेकर तेज हुई राजनीतिक बहस
● भाजपा ने मध्य प्रदेश मॉडल लागू करने की कही बात
● कांग्रेस ने सभी धार्मिक ट्रस्टों में समान व्यवस्था की मांग उठाई
● इतिहास और पारदर्शिता पर दोनों दलों के अलग अलग तर्क
पत्रकार सत्ता। शबीह हैदर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। भाजपा के पूर्व मंत्री दानिश अंसारी के बयान के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने नई मांग उठाकर इस बहस को और गर्म कर दिया है। दोनों नेताओं ने अपने अपने तर्कों के साथ धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन और पारदर्शिता का मुद्दा सामने रखा है।
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भाजपा के पूर्व मंत्री दानिश अंसारी ने कहा था कि यदि मध्य प्रदेश की तर्ज पर उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है तो इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बेहतर संवाद स्थापित होगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में भी इसी व्यवस्था को लागू करने की आवश्यकता बताई थी। दानिश अंसारी का कहना था कि धार्मिक संस्थाओं के संचालन में पारदर्शी व्यवस्था जनता का विश्वास मजबूत करेगी।
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दानिश अंसारी के इस बयान के एक दिन बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार से सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि यदि वक्फ संशोधन कानून के तहत वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति उचित मानी जा रही है तो यही व्यवस्था मंदिरों मठों गुरुद्वारों और चर्चों के ट्रस्टों में भी लागू की जानी चाहिए। उनके अनुसार सभी धार्मिक संस्थाओं के लिए समान नियम होने चाहिए जिससे पारदर्शिता और सामाजिक सौहार्द दोनों मजबूत हों।
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शाहनवाज आलम ने कहा कि यदि सरकार वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को पारदर्शिता का माध्यम मानती है तो मंदिर ट्रस्टों में ऐसी व्यवस्था लागू न करना दोहरे मापदंड को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी धार्मिक संस्थाओं में समान व्यवस्था लागू होने से सभी समुदायों के बीच विश्वास बढ़ेगा।
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अवध के नवाब आसिफुद्दौला ने गोरखनाथ पीठ के लिए भूमि दान की थी। उन्होंने यह भी कहा कि मुगल शासक औरंगजेब ने महाकाल मंदिर कामाख्या मंदिर जंगमबाड़ी मठ बालाजी मंदिर और उमानंदा मंदिर सहित कई धार्मिक संस्थाओं को भूमि प्रदान की थी। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में धार्मिक आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वक्फ बोर्ड का मुद्दा अब केवल धार्मिक संस्थाओं तक सीमित नहीं रहा बल्कि विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक विषय बनता जा रहा है। भाजपा पारदर्शिता और सहभागिता का मुद्दा उठा रही है जबकि कांग्रेस सभी धार्मिक संस्थाओं में समान व्यवस्था लागू करने की मांग कर रही है। आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।




