1 वर्षों में 738 से अधिक लोगों का पुनर्वास
पत्रकार सत्ता
लखनऊ। सामाजिक संस्था बदलाव द्वारा संचालित 21 दिवसीय भिक्षावृत्ति उन्मूलन जनजागरूकता अभियान ‘सार्थक भाग-3’ का शुक्रवार को समापन हो गया। अभियान के अंतिम दिन दरगाह हजरत अब्बास, रुस्तमनगर, चरक चौराहा, चौक, शाहमीना मजार और नखास चौराहे सहित कई स्थानों पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को भिक्षावृत्ति की समस्या और उसके स्थायी समाधान के प्रति जागरूक किया गया।
अभियान की विशेषता यह रही कि नुक्कड़ नाटक की टीम में ऐसे लोग भी शामिल थे, जो कभी स्वयं भिक्षावृत्ति से जुड़े रहे थे। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि अवसर, विश्वास और पुनर्वास के माध्यम से सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत संभव है। नाटक की कहानी भी इन्हीं वास्तविक अनुभवों पर आधारित थी।

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संस्था के संस्थापक शरद पटेल ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल भिक्षावृत्ति समाप्त करना नहीं, बल्कि समाज की सोच में भी सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग अपनी आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण भीख मांगने को मजबूर होते हैं। ऐसे लोगों तक लगातार संवाद, विश्वास और पुनर्वास की सुविधाएं पहुंचाना आवश्यक है।
मनकामेश्वर मंदिर से शुरू हुआ यह अभियान 21 दिनों तक शहर के मंदिरों, मस्जिदों, मजारों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशन और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचा। इस दौरान लोगों को पुनर्वास केंद्रों, आश्रय गृहों और रोजगार से जोड़ने की जानकारी भी दी गई। अभियान के दौरान कई लोगों ने भिक्षावृत्ति छोड़कर पुनर्वास प्रक्रिया में शामिल होने की इच्छा जताई, जबकि कुछ लोग संस्था के पुनर्वास केंद्र से जुड़ चुके हैं।

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संस्था के अनुसार पिछले 11 वर्षों में उसके पुनर्वास मॉडल के माध्यम से 738 से अधिक लोगों को सम्मानजनक जीवन से जोड़ा गया है। इनमें 592 वयस्क और 146 बच्चे शामिल हैं, जो आज शिक्षा, स्वरोजगार और रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं। संस्था का कहना है कि अभियान समाप्त होने के बाद भी पुनर्वास और जनसंवाद की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी।




