पत्रकार सत्ता | लखनऊ ब्यूरो
अपनी जनता पार्टी (AJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत के मुसलमान और ईसाई विदेशी नहीं, बल्कि इसी देश के मूल निवासी हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक भेदभाव और जातिगत अपमान से मुक्ति तथा सम्मान और स्वाभिमान की तलाश में अनेक लोगों ने समय-समय पर विभिन्न धर्मों को अपनाया।
कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत का मुसलमान न तो अरब का है, न सऊदी अरब का और न ही इराक का, बल्कि वह भारत का नागरिक है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने जातिगत अपमान और सामाजिक भेदभाव से बचने के लिए इस्लाम स्वीकार किया, वे इसी देश के लोग हैं।
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उन्होंने आगे कहा कि इसी प्रकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के अनेक लोगों ने सम्मान और स्वाभिमान की चाह में ईसाई धर्म अपनाया। मौर्य ने कहा कि इसलिए भारत के मुसलमान और ईसाई विदेशी नहीं, बल्कि इसी मिट्टी के लोग हैं और उन्हें बाहरी बताना इतिहास और सामाजिक वास्तविकता के विपरीत है।
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स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने संबोधन में भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार बाबा साहब ने सामाजिक सम्मान और समानता के लिए बौद्ध धर्म स्वीकार किया था, उसी प्रकार हजारों-लाखों लोगों ने भी सम्मान और स्वाभिमान की तलाश में अन्य धर्मों को अपनाया।
उन्होंने कहा कि समाज को धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि समानता, भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए।




