महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी कानून पर शाहनवाज आलम ने उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट से समीक्षा की मांग

महाराष्ट्र धर्मांतरण कानून पर शाहनवाज आलम का सवाल, सुप्रीम कोर्ट से समीक्षा की मांग

मुंबई के चर्चों पर हमलों को लेकर महाराष्ट्र सरकार से श्वेतपत्र जारी करने की मांग

पत्रकार सत्ता ब्यूरो
नई दिल्ली । कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने महाराष्ट्र के धर्मांतरण विरोधी कानून की सुप्रीम कोर्ट से समीक्षा कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कानून के कई प्रावधान मौलिक अधिकार, समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।

आलम ने कहा कि मुंबई के आसपास वसई, विरार, पालघर, नालासोपारा और भयंदर में पिछले छह महीनों में 11 चर्चों पर हमले किए जाने का आरोप है। उन्होंने दावा किया कि इन मामलों में आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि चर्चों में प्रार्थना के लिए आने वाले लोगों से सहमति से आने का शपथपत्र भरवाया जाना ईसाई समुदाय में भय की स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने न्यायपालिका द्वारा इस मामले पर स्वतः संज्ञान नहीं लेने पर भी सवाल उठाया।

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कांग्रेस नेता ने महाराष्ट्र सरकार से पिछले एक वर्ष में चर्चों पर हुए हमलों और आरोपियों के खिलाफ हुई कार्रवाई का श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मांतरण विरोधी कानून का इस्तेमाल अल्पसंख्यक समुदाय को डराने के लिए किया जा सकता है।

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हालांकि, चर्चों पर हमलों, आरोपियों की गिरफ्तारी और कानून के प्रावधानों को लेकर आलम द्वारा लगाए गए आरोप उनके बयान पर आधारित हैं। सरकार या संबंधित एजेंसियों का पक्ष इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं है।

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