लखनऊ में हर 4 मिनट में एक शिकार, दो साल में लाखों डॉग बाइट केस

लखनऊ में हर 4 मिनट में एक शिकार

सवालों के घेरे में नगर निगम की व्यवस्था

फीचर लेखक : निहाल अहमद
जिला स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट, जो कई अखबारों में प्रकाशित हुई है, के अनुसार लखनऊ में कुल जानवरों के काटने के 1,73,759 मामले दर्ज हुए हैं। इसमें कुत्ता, बंदर सहित अन्य जानवरों के काटने के मामले शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार इनमें 85-90 प्रतिशत मामले अकेले कुत्ते के काटने के होते हैं।

मतलब करीब 1.55 लाख से 1.60 लाख मामले सिर्फ डॉग बाइट के हैं।

2025 का नया आंकड़ा

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 1 जनवरी से 30 जून 2025 तक 18,907 लोगों को कुत्तों ने काटा और उन्हें एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाया गया।

और सिर्फ जून 2025 में ही लखनऊ के तीन बड़े अस्पतालों—बलरामपुर, सिविल और लोहिया—में 4,000 से ज्यादा लोग कुत्ते के काटने के बाद पहुंचे।

रोज का औसत अभी भी वही है, जो पिछले साल था:

3 प्रमुख अस्पतालों में रोज करीब 100 नए मामले।

बलरामपुर अस्पताल की ओपीडी में रोज 250 से ज्यादा मामले, जिसमें 60-70 नए केस होते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक महीने में कुल 10 हजार एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए हैं।
2023-24 के लिए

अलग से लखनऊ का 2023-24 का आंकड़ा प्रकाशित नहीं हुआ, लेकिन पूरे उत्तर प्रदेश में 2023-24 और 2024-25 में 2,84,641 आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन हुई है। लखनऊ अभी भी टॉप-10 जिलों में है, जहां डॉग बाइट के मामले सबसे ज्यादा हैं।

इसे भी देखें- RAW Group of Company के भवन में देर रात लगी आग, 8 फायर टेंडर ने संभाला मोर्चा

मतलब पिछले दो साल में लखनऊ नगर निगम क्षेत्र में लगभग 3 लाख से ज्यादा लोग सरकारी रिकॉर्ड में ही जानवरों के काटने के शिकार हुए हैं, जिसमें से करीब 2.7 लाख मामले सिर्फ कुत्तों के काटने के हैं।

सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के कुत्तों के काटने का शिकार होने के बावजूद नगर निगम की ओर से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं?

यह भी पढ़ें- दुधारू पशुओं की नीलामी के विरोध में सपा का नगर निगम मुख्यालय पर धरना

लेखकः निहाल अहमद, स्वतंत्र टिप्पणीकार, समाजवादी पार्टी के नेता एवं मलिहाबाद से जिला पंचायत सदस्य हैं।

 *इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें दिए गए आंकड़े लेखक द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी एवं रिपोर्टों पर आधारित हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *