पत्रकार सत्ता, लखनऊ ब्यूरो|
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर तीखा हमला बोला है। राजधानी लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने ट्रस्ट को तत्काल भंग करने तथा पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की।
अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए उससे जुड़े किसी भी मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में लोगों का ट्रस्ट पर भरोसा प्रभावित हुआ है और इसी कारण नए सिरे से जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
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कांग्रेस की चार प्रमुख मांगें
- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए।
- पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए।
- जिन जिम्मेदार व्यक्तियों पर गंभीर आरोप हैं, उनके विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की जाए।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें ताकि श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहे।
सरकार पहले ही गठित कर चुकी है SIT
इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर चुकी है। अधिकारियों के अनुसार यह जांच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर शुरू की गई थी ताकि दान और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सके।
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मुख्यमंत्री योगी का जवाब
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर रामभक्तों की भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया तथा कहा कि जांच प्रक्रिया जारी है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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मामला राजनीतिक बहस का केंद्र
राम मंदिर से जुड़े इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल न्यायिक निगरानी में जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं राज्य सरकार का कहना है कि जांच निष्पक्ष ढंग से आगे बढ़ रही है और उसके निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




