जमीयत उलेमा-ए-हिंद अध्यक्ष बोले— चुनावी लाभ के लिए मुस्लिम संस्थानों को बनाया जा रहा निशाना
पत्रकार सत्ता न्यूज़
नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मदरसों को आतंकवाद का केंद्र बताए जाने संबंधी बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मदरसों को आतंकवाद का अड्डा बताना सांप्रदायिकता और पूर्वाग्रह की पराकाष्ठा है तथा इस प्रकार के बयान देश की सामाजिक एकता और संवैधानिक मूल्यों के लिए नुकसानदेह हैं।
अरशद मदनी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में कहा कि यह विडंबना है कि जिनकी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े लोगों पर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजों से दया याचिका मांगने के आरोप लगते रहे, वही आज मदरसों को आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी और राजनीतिक लाभ के लिए मुसलमानों तथा उनके शैक्षणिक संस्थानों को बार-बार बेबुनियाद आरोपों का निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कभी मदरसों के पाठ्यक्रम पर सवाल उठाए जाते हैं, कभी उनकी देशभक्ति पर और कभी उन्हें आतंकवाद की नर्सरी बताने की कोशिश की जाती है।
मदनी ने कहा कि इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान समाज में नफरत और अविश्वास फैलाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच देश की सांप्रदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और संविधान की मूल भावना को कमजोर करती है।




