मुख्यमंत्री छह माह में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की बात कह रहे, उपमुख्यमंत्री बोले- नौकरी के चक्कर में मत पड़ो : निहाल अहमद
ज़मीर हैदर । पत्रकार सत्ता
लखनऊ। वरिष्ठ समाजवादी पार्टी नेता एवं मलिहाबाद से जिला पंचायत सदस्य निहाल अहमद ने उत्तर प्रदेश सरकार के रोजगार संबंधी बयानों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अगले छह माह में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक युवाओं को नौकरी के पीछे न भागने और ई-रिक्शा अथवा टैक्सी चलाकर स्वरोजगार अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
निहाल अहमद ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल में ‘मिशन रोजगार’ के तहत अगले छह माह में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने और हर सप्ताह बड़े भर्ती आयोजन किए जाने की बात कही है। सरकार की ओर से नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम भी किए जा रहे हैं।
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वहीं, निहाल अहमद ने 23 सितंबर को लखनऊ में ‘भारत टैक्सी’ सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बयान का हवाला दिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पाठक ने युवाओं से कहा कि वे नौकरी के चक्कर में न पड़ें, कुछ घंटे अपनी गाड़ी चलाएं और परिवार के साथ समय बिताएं। उनके इस बयान के बाद रोजगार को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हुई।
निहाल अहमद ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदेश के युवाओं के लिए उसकी रोजगार नीति क्या है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि युवाओं को सरकारी एवं नियमित रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार बड़े स्तर पर भर्ती अभियान चला रही है, तो फिर सार्वजनिक मंच से युवाओं को नौकरी की तलाश छोड़कर ई-रिक्शा या टैक्सी चलाने की सलाह क्यों दी जा रही है।
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उन्होंने लखनऊ में ई-रिक्शा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने शहर में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या और उससे पैदा हो रही यातायात समस्या पर चिंता जताई थी। अदालत के समक्ष राज्य सरकार ने भी ई-रिक्शा के प्रभावी नियमन के लिए केंद्र सरकार से अधिकार दिए जाने की मांग किए जाने की जानकारी दी थी।
निहाल अहमद ने कहा कि रोजगार का सवाल केवल किसी एक वाहन को चलाने तक सीमित नहीं है। युवाओं की शिक्षा, योग्यता, स्थायी रोजगार, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट नीति की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से रोजगार संबंधी घोषणाओं और जमीनी स्तर पर उपलब्ध अवसरों के बीच स्पष्टता रखने की मांग की।
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उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार के अवसर देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए और सरकार को यह बताना चाहिए कि वह सरकारी नौकरियों, निजी रोजगार और स्वरोजगार के बीच किस तरह संतुलित रोजगार नीति लागू कर रही है।
ब्यूरो रिपोर्ट, लखनऊ




