हिंदी दिवस पर शब्दांगन की काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह में साहित्यकारों का सम्मान
निर्भय सक्सेना । पत्रकार सत्ता
बरेली। साहित्यिक संस्था शब्दांगन की ओर से हिंदी दिवस के अवसर पर काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों और कवियों ने हिंदी भाषा के महत्व, उसकी समृद्ध परंपरा और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर विचार रखे। इस दौरान कवियों ने अपनी रचनाओं का काव्यपाठ कर हिंदी के प्रति सम्मान और प्रेम व्यक्त किया।
कार्यक्रम में डॉ. सुरेश रस्तोगी, रमेश गौतम, इंद्रदेव त्रिवेदी, विनोद कुमार गुप्ता, डीएल गंगवार, मोहित रस्तोगी, शिवम् वर्मा और राम प्रकाश सिंह ‘ओज’ को माला, उत्तरीय और पेन सेट भेंट कर सम्मानित किया गया।
मां शारदे की वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कूंचा डालचंद्र स्थित डॉ. सुरेश रस्तोगी के सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद शब्दांगन के महामंत्री इंद्रदेव त्रिवेदी ने मां शारदे की वंदना प्रस्तुत की।
काव्य गोष्ठी में नवगीतकार रमेश गौतम ने हिंदी भाषा को समर्पित अपनी रचना प्रस्तुत की। उन्होंने हिंदी को ज्ञान, अनुभूति और सृजन से जोड़ते हुए भाषा के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
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कवि राम प्रकाश सिंह ‘ओज’ ने भी हिंदी के प्रति प्रेम और मातृभाषा के महत्व को अपनी रचना के माध्यम से सामने रखा। वहीं इंद्रदेव त्रिवेदी ने हिंदी के प्रति समर्पण का संदेश देते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की।
मोहित रस्तोगी ने भारत और उसकी प्राकृतिक सुंदरता को केंद्र में रखते हुए गीत प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।
हिंदी की वर्तमान प्रासंगिकता पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान डॉ. सुरेश रस्तोगी, विनोद कुमार गुप्ता और डीएल गंगवार ने हिंदी भाषा की वर्तमान प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बदलते समय और तकनीक के दौर में हिंदी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए साहित्य, शिक्षा और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल की आवश्यकता है।
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वक्ताओं ने हिंदी को केवल एक भाषा के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में रेखांकित किया।
कार्यक्रम का संचालन इंद्रदेव त्रिवेदी ने किया। अंत में शिवम् वर्मा ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
रिपोर्ट- निर्भय सक्सेना, बरेली ब्यूरो




