एक सप्ताह में मांगा स्वीकृत मानचित्र और अभिलेख; शिकायतकर्ता संजय शर्मा ने उठाए गंभीर सवाल
पत्रकार सत्ता ब्यूरो
लखनऊ । अलीगंज की भयावह अग्निकांड त्रासदी के बाद भी राजधानी में भवन निर्माण और एलडीए की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला कैंट रोड स्थित बर्लिंगटन कंपाउंड का है, जहां सार्वजनिक सड़क के ऊपर प्लेटफॉर्म और अपार्टमेंट्स से जुड़े निर्माण को लेकर शिकायत के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अब संबंधित पक्ष से स्वीकृत मानचित्र और अभिलेख तलब किए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिकायतकर्ता संजय शर्मा द्वारा आईजीआरएस के माध्यम से मामला उठाए जाने के बाद 19 अगस्त 2026 को स्थल निरीक्षण किया गया। एलडीए की जांच आख्या में बताया गया कि बर्लिंगटन कंपाउंड करीब 46 वर्ष पुराना है, जहां लगभग 100 भवन और करीब 1500 की आबादी है। निरीक्षण के समय मौके पर कोई नवीन निर्माण होता नहीं पाया गया।
लेकिन सवाल पुराने निर्माण को लेकर है—क्या जो निर्माण वर्षों से मौजूद है, वह स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप है?
एफआई बिल्डर के सिराज इकबाल को नोटिस
मामले में एलडीए के प्रवर्तन जोन-6 के सहायक अभियंता ने एफआई बिल्डर के सिराज इकबाल, ओनर/अध्यक्ष/सचिव, बर्लिंगटन कंपाउंड, कैंट रोड, कैसरबाग को नोटिस जारी किया है। नोटिस में संबंधित भूखंड और भवन का स्वीकृत मानचित्र तथा साक्षीय अभिलेख एक सप्ताह के भीतर एलडीए कार्यालय में उपलब्ध कराने को कहा गया है। निर्धारित समय में अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने पर उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
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यानी अब एलडीए के रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति के बीच तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
- सड़क के ऊपर निर्माण की अनुमति किसने दी?
- शिकायतकर्ता संजय शर्मा ने बर्लिंगटन कंपाउंड स्थित सरवरी अपार्टमेंट सहित ए, बी, सी, डी ब्लॉक और अन्य अपार्टमेंट में संभावित मानचित्र उल्लंघन तथा भवन उपयोग को लेकर सवाल उठाए हैं।
- सबसे बड़ा सवाल सार्वजनिक सड़क के ऊपर बने प्लेटफॉर्म और निर्माण को लेकर है।
- यदि यह निर्माण स्वीकृत मानचित्र का हिस्सा है तो एलडीए को यह स्पष्ट करना होगा कि सार्वजनिक सड़क के ऊपर निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई।
- और यदि यह स्वीकृत मानचित्र में शामिल नहीं है तो फिर सवाल यह है कि यह निर्माण इतने वर्षों तक कैसे चलता रहा?
- क्या निर्माण के समय नहीं हुई थी जांच?
- मामले ने एलडीए की प्रवर्तन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
- क्या निर्माण के समय स्थल का निरीक्षण नहीं हुआ?
- क्या स्वीकृत मानचित्र और वास्तविक निर्माण का मिलान नहीं किया गया?
- क्या सार्वजनिक सड़क की स्थिति और भवन की स्थिति का कभी तकनीकी सत्यापन नहीं हुआ?
- अगर निर्माण अनधिकृत है तो इतने वर्षों तक उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- इन सवालों का जवाब अब एलडीए की जांच और संबंधित अभिलेख सामने आने के बाद ही मिल सकेगा।
- सड़क सिर्फ रास्ता नहीं, आपातकालीन रास्ता भी है
सार्वजनिक सड़क पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अनधिकृत निर्माण केवल यातायात की समस्या नहीं है। आपदा की स्थिति में यही रास्ते एंबुलेंस, अग्निशमन वाहन और अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
ऐसे में यदि किसी सार्वजनिक सड़क के ऊपर या उसकी सीमा को प्रभावित करते हुए निर्माण की पुष्टि होती है तो मामला और गंभीर हो जाता है।
हाल में अलीगंज में हुई अग्निकांड त्रासदी के बाद भवन सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था और अनधिकृत निर्माण को लेकर पहले ही गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे समय में किसी पुराने निर्माण की शिकायत पर एलडीए की कार्रवाई को महज एक सामान्य शिकायत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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एक शिकायत ने खोल दी वर्षों पुरानी फाइल
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि एलडीए की कार्रवाई संजय शर्मा की शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायत के बाद स्थल निरीक्षण हुआ और अब संबंधित पक्ष से स्वीकृत मानचित्र व अभिलेख मांगे गए हैं। यही स्थिति एलडीए की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है—क्या प्राधिकरण संभावित अनधिकृत निर्माणों पर स्वतः निगरानी करता है या फिर किसी नागरिक के शिकायतकर्ता बनने का इंतजार करता है?
समाचार लिखे जाने तक एफाआई बिल्डर्स की तरफ से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। उनकी प्रतिक्रिया मिलने के बाद समाचार का अपडेट वर्जन प्रकाशित किया जायेगा।




